आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा का सरगना हाफिज सईद
आतंकी संगठन लश्कर-ए-ताइबा का सरगना और दुनिया के सबसे वांछित आतंकियों में शुमार हाफिज सईद के संगठनों पर पाकिस्तान सरकार ने कथित तौर पर शिकंजा कस दिया है। पाक की वित्तीय नियामक संस्था प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसीपी) ने सोमवार को जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन के चंदा लेने पर प्रतिबंध लगा दिया। इस व्यवस्था का पालन न करने वालों पर भारी जुर्माना लगेगा। फिलहाल 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। समाचार पत्र ‘द डॉन’ की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
आयोग की अधिसूचना के अनुसार, कंपनियों के उन सभी संस्थाओं और लोगों को चंदा देने पर रोक रहेगी, जिनका नाम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रतिबंधित की सूची में डाला है। इसमें जमात-उद-दावा के साथ-साथ लश्कर-ए-ताइबा, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ), पासबां-ए-अहले-हदीस और पासबां-ए-कश्मीर शामिल हैं। जनवरी, 2017 में पाक सरकार ने जमात-उद-दावा (जेयूडी) के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद हाफिज सईद को नजरबंद कर लिया गया था। हालांकि गत वर्ष नवंबर में लाहौर हाईकोर्ट के नजरबंदी की मियाद बढ़ाने से इनकार करने के बाद सईद को रिहा कर दिया गया।
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जेयूडी और एफआईएफ के खिलाफ कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मंत्री अहसान इकबाल ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को सभी प्रतिबंधित संगठनों के फंड जुटाने के रास्तों को बंद करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई अमेरिका के दबाव में नहीं की जा रही है। पाकिस्तान एक जिम्मेदार देश के नाते अपने नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति अपने कर्तव्य निर्वहन के तहत यह कदम उठा रहा है।
उधर, पाक सरकार के जेयूडी और एफआईएफ की संपत्ति जब्त करने संबंधी रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए दोनों संगठनों ने कहा, वे मामले को अदालत में ले जाएंगे। जेयूडी के प्रवक्ता याहया मुजाहिद ने ‘द डॉन’ से कहा, लाहौर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट व्यवस्था दी है कि जेयूडी आजाद है। वह पाकिस्तान में अपनी कल्याणकारी गतिविधियां चला सकता है। पाक सरकार भारत के तुष्टिकरण के लिए ऐसी कोशिश कर रही है। जेयूडी को मुंबई हमले के जिम्मेदार लश्कर-ए-ताइबा का मुखौटा संगठन माना जाता है। अमेरिका ने 2014 में इसे विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया है।