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पाकिस्तान चुनाव 2018: आजादी के 23 साल बाद हुआ था पाकिस्तान में पहला आम चुनाव

Tue, 26 Jun 2018 06:47 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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पाकिस्तान और भारत को आजादी साथ-साथ मिली थी। इन 71 सालों में पाकिस्तान कई बार पटरी से उतरा और चढ़ा है। पाकिस्तान की राजनीति को करीब से देखने वाले पाकिस्तान की अशांति की वजह आजादी के आंदोलन के नेतृत्व करने वाले नेताओं का जल्दी से उठ जाना बताते हैं। 

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इन नेताओं में कायद-ए-आजम मोहम्मद अली जिन्ना की मौत 1948 में हो गई जबकि प्रधानमंत्री लियाकत अली खान सैन्यशासन का शिकार हुए।  लेकिन भारत में पंडित नेहरू जैसे नेता 1964 तक अपने देश का नेतृत्व करते रहे। जैसे घर में बड़े बुजुर्ग की लोग सुनते हैं वैसे ही देशवासी भी प्रथम पुरुष यानी आजादी के लिए संघर्ष करने वाले नेता की लोग सुनते हैं। लेकिन पाकिस्तान इन सबसे अछूता रहा। दिग्गज नेताओं के जल्द दुनिया से चले जाने से कई अहम मुद्दों पर आम सहमति नहीं बन पाई और पाकिस्तान में असंतोष का माहौल बढ़ता गया। सत्ता की चाह ने सेना प्रमुखों को तानाशाह बनाया जिन्होंने पाकिस्तान में अंशाति फैलाने में अहम भूमिका निभाई।  

भारत में 1951 में, पाकिस्तान में 1970 में हुआ पहला आम चुनाव 

भारत में 1950 में संविधान लागू हुआ जबकि पाकिस्तान में 1956 तक संविधान तक नहीं बन पाया। देश में चुनाव नहीं हुए,सेना प्रमुख तानाशाह बने और देश का शासन उनके हाथों में चला गया। 
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भारत में पहला आम 1951-52 में हुआ और विरोधी पार्टी न होने की वजह से पंडित जवाहर लाल नेहरू ही प्रधानमंत्री रहे जबकि सैन्य शासन झेल रहे पाकिस्तान में आजादी के 23 साल बाद 1970 में पहला आमचुनाव हुआ। उसके बाद अभी तक वहां 13 बार सरकारें बनी हैं।

 बार बार तख्तापलट का दंश झेल रहे पाकिस्तान में 18 लोग 22 बार प्रधानमंत्री बने जिसमें सबसे अधिकबार पीएम बनने का रिकॉर्ड नवाज शरीफ को जाता है। वह अभी तक पाकिस्तान के पांच बार प्रधानमंत्री बन चुके हैं। 

एकबार फिर पाकिस्तान में 25 जुलाई को आम चुनाव के लिए मतदान होगा। यह बात चौंकाती है कि 35 साल सैन्य शासन झेलने वाले पाकिस्तान में सिर्फ दो बार ही सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर पाई। नई सरकार का चुनाव 10.5 करोड़ मतदाता करेंगे, जिनमें से 1.77 करोड़ मतादाताओं की उम्र 18 से 25 के बीच है।

पाकिस्तान चुनाव आयोग के अनुसार, नामांकन के आखिरी दिन 11 जून तक 12 हजार नामांकन पत्र भरे गए थे।संसद में कुल 342 सीटें हैं, लिहाजा सरकार बनाने के लिए 172 सीटों की जरूरत होगी। हालांकि, पाकिस्तान की राजनीति के जानकार लोगों का मानना है कि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा।  मौजूदा संघीय सरकार का कार्यकाल 31 मई को खत्म हो गया। इसके बाद से पूर्व न्यायाधीश नासिर उल मुल्क को अंतरिम सरकार का प्रमुख बना दिया गया था।

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