शहीद-ए-आजम भगत सिंह और उनके साथियों के मुकदमे से जुड़े कुछ रिकॉर्ड को पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार को एक प्रदर्शनी में लगाया। पाक सरकार के इस कदम की सिविल सोसायटी और अधिकार समूहों ने काफी प्रशंसा की।
बता दें कि ब्रिटिश पुलिस अधिकारी की हत्या के जुर्म में 87 साल पहले भगत सिंह को फांसी दे दी गई थी। इस हफ्ते की शुरूआत में पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने भगत सिंह के मुकदमे से जुड़े कुछ रिकॉर्ड को प्रदर्शित किया। उन रिकॉर्डों को लाहौर में अनारकली के ऐतिहासिक मकबरे पर आयोजित एक प्रदर्शनी में शामिल किया गया।
उस मामले को ‘लाहौर साजिश मामला’ के नाम से जाना जाता है। पंजाब अभिलेखागार विभाग के निदेशक अब्बास चुघाटी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जनता की अच्छी प्रतिक्रिया को देखते हुए हमने इस प्रदर्शनी को रविवार तक के लिए बढ़ा दिया है। इससे पहले हमने इसे केवल एक दिन के लिए आयोजित करने का विचार किया था।
चुघाटी ने कहा कि प्रदर्शनी में लाहौर साजिश मामले और अखबारों की कटिंग से संबंधित कुल 50 दस्तावेज प्रदर्शनी में लगाए गए। उन्होंने कहा कि ये सभी रिकॉर्ड हमारे पास हैं। 23 साल के भगत सिंह को ब्रिटिश शासकों को 1931 में लाहौर में फांसी पर चढ़ा दिया गया था।