पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के वित्तपोषण की निगरानी करने वाली संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) को उसके एशिया प्रशांत संयुक्त समूह के सह अध्यक्ष पद से हटाने का अनुरोध किया है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने पेरिस स्थित संस्था एफएटीएफ के अध्यक्ष मार्शल बिलिंगसलीआ को भेजे एक पत्र में भारत के अलावा उनसे किसी अन्य सदस्य देश को एशिया पेसिफिक ज्वाइंट ग्रुप का सह अध्यक्ष नियुक्त करने के लिए कहा है ताकि एफएटीएफ की समीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ हो।
उमर ने पत्र में लिखा है, ‘‘पाकिस्तान के प्रति भारत का द्वेष भाव जगजाहिर है और हाल में पाकिस्तान के वायु क्षेत्र का उल्लंघन और पाकिस्तानी क्षेत्र में बम गिराया जाना भारत के शत्रुतापूर्ण रवैया का एक और उदाहरण है।’’
वहीं एफएटीएफ की सिफारिशों को लागू करने के लिए पाकिस्तान जैश-ए-मोहम्मद समेत प्रतिबंधित संगठनों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार इन प्रतिबंधित संगठनों की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू करेगी।
एफएटीएफ दुनिया में आतंकवादी फंडिंग पर नजर रखने वाली एक संस्था है। भारत यह चाहता है कि पाकिस्तान को एफएटीएफ की ब्लैक लिस्ट में रखा जाए। एफएटीएफ ने पाकिस्तान द्वारा इन संगठनों को ‘कम’ से ‘मध्यम’ जोखिम मानने पर एतराज जताया था। एफएटीएफ ने कहा था कि पाकिस्तान ने अलकायदा, जैश, हक्कानी नेटवर्क, फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन, लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा के अलावा तालिबान से जुड़े लोगों की ओर से उत्पन्न वित्तपोषण जोखिमों की उचित समझ प्रदर्शित नहीं की।
अंग्रेजी अखबार डॉन के मुताबिक, अब सरकार ने इन प्रतिबंधित संगठनों को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखने का फैसला किया है। प्रतिबंधित संगठनों की कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था के सभी स्तरों पर जांच की जाएगी। इतना ही नहीं, इनके बैंक खातों के अलावा इन्हें मिलने वाले फंड की भी जांच की जाएगी। एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान सरकार ने यह कदम पिछले महीने पेरिस में एफएटीएफ की बैठक के बाद उठाया है। बैठक में पाकिस्तान के वित्त सचिव आरिफ अहमद खान ने भी शिरकत की थी। इसी के बाद 21 फरवरी को जमात-उद-दावा और उससे जुड़े फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन पर बैन लगाया गया था।
चार दिन पहले पाकिस्तानी वित्त सचिव खान ने चेतावनी दी थी कियदि एफएटीएफ के सख्त आर्थिक प्रतिबंधों से बचना है तो पाक को जल्द ही आतंकी संगठनों के खिलाफ कुछ सख्त कदम उठाने होंगे। उनका यह बयान ऐसे समय आया था जब एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं किया था। बैठक में भारत ने पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डालने की पुरजोर वकालत की थी।