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पाक सेना कर रही है सिस्टम की धुलाई

Tue, 01 Sep 2015 03:54 PM IST
वुसतुल्लाह ख़ान/बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान
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पाकिस्तान के सबसे बडे शहर कराची में लगभग दो साल पहले जब भत्ताखोरी, भ्रष्टाचार, स्ट्रीट क्राइम, लैंड माफिया और चरमपंथ के खिलाफ अर्ध सैनिक बल, रेंजर्स और पुलिस का ऑपरेशन शुरू हुआ तो सब भत्ताखोरों, भ्रष्टचारियों, स्ट्रीट क्रिमिनलों, लैंड माफियाओं और चरमपंथियों ने इसकी सराहना की, क्यूंकि सब जानते थे कि पहले भी सरकार ऐसे कच्चे-पक्के ड्रामे करती रही है और थक हारकर बैठकर गई।
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इस बार भी यही होगा इसलिए जरा देर को हम लोग भी छुट्टी मनाकर थोडा आराम-वाराम कर लेते हैं। मगर इस बार ऐसा नहीं हुआ, रेंजर्स और इंटेलिजेंस एजेंसियों ने पहले की तरह सब पर एक साथ हाथ डालने की गलती नहीं कि बल्कि पहले सडक छाप अपराधियों की खबर ली उसके बाद भत्ताखोरों की तरफ मुडी, फिर बाएँ को टर्न लेकर लैंड माफिया के पीछे दौड पडी और फिर अचानक दाएँ हाथ को यू-टर्न लेते हुए भ्रष्टाचारियों के पीछे भाग पडी।

जबकि चरमपंथियों के साथ भी अब तक छप्पन वाली फिल्म चल रही है।जिन-जिन पर हाथ पडता जा रहा है, वो ऑपरेशन की सराहना छोड इधर उधर छुपते फिर रहे हैं। जिनके कनेक्शन हैं वो दुबई या लंदन की टिकट कटा रहे हैं।जो पीछे रह गए वो गिरफ्तारी से पहले जमानत के लिए कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगा रहे हैं।
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एमक्यूएम की बारी

हालत ये है कि सिर्फ सिंध प्रांत में चीफ सेक्रेटरी, मौजूदा और पूर्व मंत्रियों से लेकर निचले अफसरों तक करीब 83 लोगों ने पकड-धकड से बचने के लिए जमानत करवा ली है और बाकी जज ढूंढते फिर रहे हैं।

राजनीतिक गुटों में सबसे पहले अल्ताफ हुसैन की एमक्यूएम की बारी आई तो नवाज शरीफ की मुस्लिम लीग और आसिफ जरदारी की पीपल्स पार्टी खुश हो गए।

जब आसिफ जरदारी के यार-दोस्तों के गले पर हाथ पडा तो नवाज शरीफ वाले भी एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि अगला कौन? रह गए इमरान खान तो वो पिछले चुनाव के बाद से आज तक ट्रक की बत्ती के पीछे दौड रहे हैं, उनकी बला से किसके साथ क्या हो रहा है।

इसलिए फैला है चरमपंथ

पाकिस्तानी संसद में बैठी जिन पार्टियों ने चरमपंथ से निपटने का पूरा अधिकार सेना को दिया वही आज एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि भइया, हमने तो सेना को चरमपंथ से निपटने का अधिकार दिया था मगर ये तो भ्रष्टाचार को भी चरमपंथ समझ बैठी है।

सेना का कहना है कि चरमपंथ फैला ही इसलिए कि पूरा सिस्टम भ्रष्ट और जब तक धुलाई नहीं होगी तब तक खून के धब्बे कैसे धुलेंगे?अब हालत ये है कि नवाज शरीफ जिनका चुनाव चिह्न शेर था वो तो कछार में जा बैठा और कछार के बाहर असली वाला शेर घूम रहा है।

यही हाल सिंध प्रांत में हुकूमत करने वाली पीपल्स पार्टी का भी है। मुख्यमंत्री कायम अली शाह का चीख चीख कर गला बैठ गया कि कराची ऑपरेशन का कप्तान मैं हूँ।
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हमें अपना काम करने दीजिए

मगर रेंजर्स वाले कहते हैं कि आप ही कप्तान हैं श्रीमान लेकिन जरा पीछे हटकर बैठिए हमें अपना काम करने दीजिए।कुछ लोग कहते हैं कि ये तो बहुत ही अच्छा है कि इस बार सेना सत्ता छीने बगैर सिविलियन को आगे करके सिस्टम की धुलाई कर रही है।

मगर पंडित लोग कहते हैं कि अगर पूरा जंगल भी सीधा हो जाए तब भी शेर से कौन पूछताछ करेगा और कौन कहेगा कि महाराज आपका काम अब पूरा हुआ, अब आप पिंजरे में जाकर थोडा सा आराम कर लें।
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