जून 2012 में राजा परवेज अशरफ को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनाए जाते वक्त ही अधिकांश पर्यवेक्षकों ने कह दिया था कि उनका कार्यकाल मुश्किलों से भरा होगा।
राजा अशरफ को युसुफ रजा गिलानी की जगह ये जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनकी मुख्य जिम्मेदारी थी अपनी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का आम चुनाव में नेतृत्व करना। ये चुनाव मई में होने हैं, और फिलहाल सरकार, न्यायालय और पाकिस्तान में बेहद ताकतवर फौज के बीच गतिरोध जारी है।
लेकिन देश के सबसे बड़े न्यायालय ने भ्रष्टाचार के मामले में प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी के आदेश जारी किए हैं। राजा परवेज अशरफ को इससे निपटना होगा।
आलोचक उन्हें 'राजा रेंटल' यानी किराए पर लिया जा सकने वाला राजा बुलाते हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने जल संसाधन और ऊर्जा मंत्री के तौर पर बहुत पैसे उगाहे थे। हालांकि, वो इन आरोपों से इंकार करते हैं।
राजनीतिक परिवार
राजा परवेज अशरफ पीपीपी के बहुत अहम सदस्य हैं और पार्टी की साझा सरकार में दो बार मंत्री रह चुके हैं। पाकिस्तान में साल 2008 से पीपीपी के ही नेतृत्व में सरकार है।
अशरफ का संबंध गुज्जर खान शहर से है, जो राजधानी इस्लामाबाद से लगभग एक घंटे के फासले पर है। उनका जन्म साल 1950 में सिंध के शहर संघर में हुआ था जहां उनके परिवार की काश्तकारी की जमीनें हैं। उन्होंने सिंध विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा हासिल की है।
राजा अशरफ सिंधी भाषा बहुत अच्छी तरह से बोलते हैं और खुद को आधा सिंधी मानते हैं। शायद ये एक बड़ी वजह है कि वो उस पार्टी में अहम मुकाम हासिल कर पाने में कामयाब रहे हैं जिसके ज्यादातर बड़े नेता इसी समुदाय से संबंध रखते हैं। उनके एक चाचा सैनिक शासक अयूब खान के मंत्रिमंडल में भी थे।
पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने अपने भाइयों के साथ मिलकर जूते का व्यापार शुरू किया था लेकिन वो कामयाब नहीं हो सका जिसके बाद राजा अशरफ प्रॉपर्टी के धंधे में लग गए। कहा जाता है कि उनका वो व्यापार खासा फल-फूल रहा है। देश की राजनीति में उन्होंने लगभग चार दशक पहले कदम रखा और पार्टी के लिए अपने क्षेत्र में काफी काम किया।
शुरुआती दौर में चुनावी मैदान में उन्हें नाकामी का मुंह देखना पड़ा जब वो लगातार तीन संसदीय चुनाव हार गए। लेकिन पिछले दो बार, यानी साल 2002 और 2008 से किस्मत उन पर मेहरबान है। राजा अशरफ युसुफ रजा गिलानी की सरकार में जल संसाधन और ऊर्जा मंत्री रहे।
अपने कार्यकाल में वो बार-बार देश में जारी बिजली की कमी को दूर करने के वादे करते रहे, जो पूरे नहीं हो पाए। इस वजह से मीडिया ने उन्हें लेकर कई तरह के लतीफे भी बनाए। इसी दौर में उन पर रिश्वतखोरी के इल्जाम भी लगे। इस मामले में उनके खिलाफ एक जांच अभी भी जारी है।
जबरदस्त राजभक्त
परवेज अशरफ लग रहे आरोपों की वजह से उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया था लेकिन कुछ महीनों में ही उन्हें सूचना और प्रसारण मंत्री बना दिया गया।
जब उनके प्रधानमंत्री बनाए जाने की बात पक्की होती नजर आई तो देश के सबसे बड़े अंग्रेजी अखबार ने अपनी मुख्य हेडलाइन में उन्हें 'रेंटल राजा' कहकर संबोधित किया।
ऊर्जा मंत्रालय में उनकी मौजूदगी के समय देश में बिजली की कमी को खत्म करने के लिए रेंटल पॉवर प्रॉजेक्ट शुरू किया गया था। लेकिन अपने ऊपर लगे आरोपों से निपटना ही उनकी एक मुश्किल नहीं रही है, सुप्रीम कोर्ट उन पर दबाव बनाती रही है कि वो स्विस प्रशासन से कहें कि वो राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच फिर से शुरू करे।
पूर्व प्रधानमंत्री गिलानी ने सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश की अनदेखी की थी जिसकी वजह से उन्हें सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। उन्होंने स्विस प्रशासन को इस बाबत लिखा भी, लेकिन अभी तक ये साफ़ नहीं है कि क्या ये जांच फिर से शुरू होगी? फिलहाल तो सबकी नजर इस बात पर है कि वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर किस तरह के क़दम उठाते हैं।