पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने भारत समेत सभी पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों पर ज़ोर दिया है।
हाल में सत्ता संभालने वाले क्लिक करें नवाज़ शरीफ ने राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में कहा कि भारत और पाकिस्तान को युद्ध पर अपने संसाधन और ऊर्जा बर्बाद करने के बजाय गरीबी, अज्ञानता और बीमारियों से लड़ाई लड़नी चाहिए।
नियंत्रण रेखा पर आए दिन दोनों तरफ से लगने वाले संघर्षविराम के उल्लंघन के आरोपों के कारण भारत और पाकिस्तान के क्लिक करें संबंध खासे तनावपूर्ण चल रहे हैं।
नवाज़ शरीफ ने कहा, “दोनों देशों के नेतृत्व को बख़ूबी पता होना चाहिए कि अतीत मे हुए युद्धों ने हमें बरसों पीछे धकेल दिया है। दुनिया भर के इतिहास ने इस हकीकत को साबित कर दिया है कि राष्ट्रों की प्रगति पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों पर ही निर्भर करती है।”
उन्होंने कहा, “यही कारण है कि हम भारत समेत सभी पड़ोसी देशो के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं।”
चरमपंथियों को न्यौता
नवाज़ शरीफ ने पाकिस्तान में जारी हिंसा को खत्म करने के लिए चरमपंथियों की तरफ भी मेल-मिलाप का हाथ बढ़ाया और उन्होंने बातचीत के लिए आमंत्रित किया है।
उन्होंने कहा कि वो जैसे भी हो आंतकवाद को खत्म करना चाहते हैं चाहे इसके लिए बातचीत करनी पड़ी, मेल-मिलाप का रास्ता अपनाना पड़े या फिर पूरी तरह बल प्रयोग करना पड़े।
उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थान और खुफिया एजेंसियां हिंसा से निपटने में नाकाम रही हैं।
पाकिस्तान कई वर्षो से न सिर्फ तालिबानी हिंसा से जूझ रहा है बल्कि सुन्नी और शियाओं के बीच भी लगातार टकराव देखने को मिलता है। इसके अलावा बलोचिस्तान प्रांत में अलगाववादी आंदोलन चल रहा है।
उन्होंने कहा कि मेलमिलाप की नीति सिर्फ राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के अनुसार, “मैं आगे कदम बढ़ाते हुए उन सभी तत्वों को बातचीत के लिए आमंत्रित करना चाहता हूं जिन्होंने दुर्भाग्य से चरमपंथी का रास्ता अपना रखा है।”
'ठोस उपायों का जिक्र नहीं'
टीवी पर प्रसारित संदेश में उन्होंने कहा, “समझदारी की मांग है कि हम ऐसा रास्ता चुनें जिसमें निर्दोष लोगों की जानों का कम से कम नुकसान हो।”
उधर, इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हैवीलैंड का कहना है कि नवाज़ शरीफ के भाषण में भावनाओं को ज्यादा जगह दी गई जबकि ठोस उपायों की चर्चा कम थी।
विदेश नीति के मुद्दे पर नवाज़ शरीफ ने कहा कि अफगानिस्तान के साथ जटिल संबंधों की समीक्षा करना उनकी प्राथमिकता है।
उन्होंने अमेरिका से भी तुरंत ड्रोन हमले रोकने को कहा जिन्हें लेकर पाकिस्तान में काफी नाराज़गी है।