पाकिस्तान भी भारत की ही तरह परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में सदस्यता पाने के लिए जी जान से लगा है। पाकिस्तान ने जोरदार आवाज उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से कहा कि उसने परमाणु सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जो महत्वपूर्ण उपाय किए हैं, वे उसकी सदस्यता की पात्रता को प्रमाणित करते हैं। अमेरिका में पाकिस्तानी राजदूत ने व्हाइट हाउस से अनुरोध किया है कि वो एनएसजी के लिए पाक की दावेदारी का समर्थन करें।
वॉशिंगटन में पाकिस्तानी दूतावास ने मीडिया में बयान जारी कर कहा है कि, 'राजदूत जलील अब्बास जिलानी ने भी अमेरिकी विदेश विभाग और कांग्रेस के नेताओं से संपर्क कर 48 देशों के इस समूह में शामिल होने के लिए पाकिस्तान की दावेदारी का समर्थन करने को कहा है।'
वाशिंगटन में पाक राजदूत कर रहे हैं बड़े अमेरिकी नेताओं से मुलाकात
लालकृष्ण आडवाणी के साथ जलील अब्बास जिलानी
- फोटो : getty
डॉन की खबर के मुताबिक वाशिंगटन में पाक राजदूत ने लगातार कई बड़े अमेरिकी नेताओं से मुलाकात कर कहा है कि पाकिस्तान एनएसजी के लिए प्रमुख दावेदार है। आपको बता दें कि एनएसजी 48 देशों की एक संस्था है जो वैश्विक परमाणु प्रौद्योगिकी को नियंत्रित करती है।
भारत भी इस समूह में सदस्यता पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। भारत को अमेरिका का पूर्ण समर्थन पहले से ही मिला हुआ है। पाकिस्तान ने 19 मई को एनएसजी में सदस्यता पाने के लिए आवेदन किया था लेकिन उसका आवेदन रिजेक्ट कर दिया गया।
पाकिस्तान पर आरोप है कि उसके कुछ वैज्ञानिकों ने ईरान और लीबिया के साथ परमाणु तकनीकि साझा की है जिसके चलते उसका आवेदन निरस्त किया गया है। इसके बाद अब पाकिस्तान ने इसी महीने दोबारा नए तरीके से एनएसजी के लिए कूटनीतिक कदम उठाए हैं।
चीन के विरोध के चलते भारत को सफलता नही मिली थी सफलता
भारत को अमेरिका सहित दुनिया की कई बड़ी शक्तियों का समर्थन प्राप्त है, फिर भी चीन के विरोध के चलते भारत को सफलता नही मिली। एनएसजी में सदस्यता पाने के लिए सभी समूह देशों का समर्थन पाना जरूरी होता है।
पाकिस्तान ने दावा किया है कि यदि उसे एनएसजी में शामिल किया जाता है तो अंतराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से यह बहुत ही बड़ा कदम होगा। पाकिस्तान के मुताबिक उसे स्वास्थ्य, कृषि और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में परमाणु प्रौद्योगिकी की जरूरत है।