पाकिस्तान की अदालत ने मुंबई हमले का मास्टरमाइंड जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सईद और उसके चार सहयोगियों की नजरबंदी को चुनौती देने वाली याचिका पर पाकिस्तान और पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया है।
न्यायमूर्ति सदाकत अली खान की अध्यक्षता वाली तीसरी पीठ ने बुधवार को सईद और उनके सहयोगियों की अर्जी पर सुनवाई की। इससे पहले लाहौर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने विभिन्न कारणों से इस अर्जी पर सुनवाई के लिए दो लगातार पीठों में बदलाव किए।
यह मामला पहले न्यायमूर्ति सरदार मोहम्मद शमीम खान की पीठ के पास था। लेकिन अदालत ने इसे रूटीन मैटर कहते हुए इस मामले को न्यायमूर्ति काजिम रजा शामशी की अध्यक्षता में दो सदस्यीय खंडपीठ के पास स्थानांतरित कर दिया गया। लेकिन इस पीठ के एक सदस्य न्यायमूर्ति चौधरी मुस्ताक अहमद का स्थानांतरण होने के बाद मामले को तीसरी पीठ को सौंप दिया गया।
न्यायमूर्ति खान की तीसरी पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सईद, मलिक जफर इकबाल, अब्दुर रहमान आबिद, काजी काशिफ हुसैन और अब्दुल्ला उबैद के वकील एके डोगार की दलीलें सुनीं।
डोगर ने अपनी दलील में कहा कि पाकिस्तान और पंजाब सरकार ने भारत और अमेरिका के दबाव में हमारे मुवक्किल को नजरबंद किया गया है। सरकार उनकी नजरबंदी पर कोई सही तर्क नहीं दिया है। लिहाजा सरकार को किसी नागरिक को बगैर तर्कपूर्ण आधार के नजरबंद नहीं किया जाना चाहिए।