पाकिस्तान की एक अदालत ने ईशनिंदा की आरोपी ईसाई लड़की के मामले को किशोर न्यायालय में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। उधर, अदालत में पेश आधिकारिक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में लड़की की उम्र 14 साल बताई गई है।
सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश अब्बास हसन ने पुलिस को किशोर न्यायालय में रिमशा मसीह के खिलाफ अलग से चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि अदालत को मिली मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में रिमशा की उम्र 14 साल बताई गई है। ऐसे में उसके मामले को किशोर न्यायालय में भेजा जाना चाहिए। कोर्ट ने पुलिस से यह भी कहा कि एक अक्तूबर को अगली सुनवाई के दौरान रिमशा और इमाम खालिद चिश्ती को एक साथ पेश करें।
गौरतलब है कि रिमशा के घर के पास स्थित मसजिद के इमाम पर उसे ईशनिंदा के झूठे आरोप में फंसाने का आरोप है। धर्मग्रंथ का पन्ना जलाने के आरोप में रिमशा मसीह को 16 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। करीब तीन सप्ताह तक उसे रावलपिंडी की अदियाला जेल में रखा गया, जहां कई बड़े आतंकी बंद हैं। शनिवार को अदालत में पुलिस ने कहा कि उन्हें रिमशा के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। प्रस्तुत रिपोर्ट के मुताबिक, तीन प्रत्यक्षदर्शियों ने बयान दिया कि चिश्ती ने जानबूझकर लड़की को फंसाया था। उधर, जेल से रिहा होने के बाद अधिकारियों ने रिमशा एवं उसके परिवारवालों को गुप्त स्थान पर रखा है।