फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आखिर पाकिस्तान के लिए क्यों बोझ बना हाफिज सईद?

Wed, 04 Oct 2017 02:53 PM IST
मोहम्मद हनीफ
विज्ञापन
विज्ञापन
जबान पहले बेअदब हुई थी अब गुस्ताख होने लगी है। जिस दिन डॉन अखबार ने रिपोर्ट किया कि राजनेताओं ने जनरलों से दबे लफ्जों में पूछा कि हाफिज सईद का क्या करना है। उसी दिन सत्तारुढ़ पार्टी के एक नेता ने कहा कि हाफिज सईद हमारे लिए कौन से अंडे देते हैं कि हम पूरी दुनिया को जवाब देते फिरें।
विज्ञापन


अब हमारे विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पूरी दुनिया के सामने कैमरे पर आकर कहा कि हाफिज सईद पाकिस्तान पर बोझ है। उन्होंने कुछ दूसरे गिरोहों के नाम भी लिए लेकिन कल तक हम उन गिरोहों के वजूद से इनकार करते थे।

लेकिन हाफिज सईद तो इस धरती के सपूत हैं और पूरी दुनिया में जाने पहचाने जाते हैं। जब पड़ोसी देश उन्हें दहशतगर्द कहता है तो हमारे दिलों से नारा-ए-तकबीर की आवाज बुलंद होती है। जब हमारा पूर्व सहयोगी उनके सिर पर 10 मिलियन का ईनाम रखता है तो हम उसे सीने का तमगा समझता हैं और पूरी कौम उनके आसपास दीवार बनकर खड़ी हो जाती है।
विज्ञापन


हाफिज कैसे बने बोझ?
हम एक पारंपरिक और क्रूर समाज हैं जहां विधवाओं, मजदूरों और घर के बुजुर्गों को बोझ समझा जाता है। आखिरी बार हमने हाफिज सईद की तस्वीर देखी तो वह घोड़े पर सवार थे और यकीनन कश्मीर या फलस्तीन या चेचन्या को आजाद करवाने के सफर पर थे।

पढ़ें: पाक में बैठे आतंकी आका बना रहे हैं राजनीतिक पार्टियां

पाकिस्तान का पहला मुजाहिदीन इस देश के लिए बोझ कैसे हो गया?
यह तो हाफिज सईद की शराफत है कि उन्होंने यह नहीं कहा कि वह देश पर बोझ नहीं हैं बल्कि ये देश उन पर बोझ है। आखिर उन्होंने कब से इस देश की रक्षा नीति का आधा बोझ अपने कंधों पर उठाया हुआ है।

साथ ही हाफिज सईद की शराफत है कि उन्होंने ये सब कहने की जगह ख्वाजा साहब पर दस करोड़ की मानहानि का दावा किया है। इस पर भी देश पूछता है कि सिर्फ दस करोड़, उससे दस गुना रकम तो अमरीका आप के सिर के लिए देने को तैयार है।

कोर्ट में पेश होने के लिए बनाया गया रक्षा मंत्री

ख्वाजा आसिफ जो हाफिज सईद को बोझ साबित करने पर तुले हैं विदेश मंत्री बनने से पहले रक्षा मंत्री हुआ करते थे। हम अकसर भूल जाते हैं कि असल में रक्षा मंत्री उस वक्त तक तकरीबन पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ होते थे।

सुप्रीम कोर्ट ने लापता लोगों के केस में आदेश जारी किया था कि रक्षा मंत्री खुद पेश हों। नवाज शरीफ खुद न पेश हों इसलिए ख्वाजा आसिफ को रक्षा मंत्री बनाया जो फौरन कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट से डांट खाने के बाद वह गुमशुदा लोगों को ढूंढने के बजाय सीधे कराची प्रेस क्लब पहुंचे जहां बलोच गुमशुदा लोगों का कैंप लगा हुआ था। वहां जाकर उन्होंने लोगों से वापस अपने घर चले जाने की पेशकश की और वह ट्रेन का किराया खुद देने को तैयार हैं।

लगता है कि अब विदेश मंत्री बनकर भी ख्वाजा आसिफ की जेब में सिर्फ ट्रेन का किराया है लेकिन उन्हें ये नहीं पता कि ट्रेन स्टेशन से कब की निकल चुकी। हाफिज सईद की घोड़े की लगाम पकड़कर चलने वाले और उनको बोझ करार देने वाले सब इस बात पर सहमत हैं कि हाफिज सईद और उनके मुजाहिदीनों ने हमारा कुछ नहीं बिगाड़ा, न कभी हमारी मस्जिद पर हमला किया, न हमारे स्कूलों में घुसकर हमारे बच्चों को शहीद किया, न कभी सेना मुख्यालय पर वार किया बल्कि अगर कभी वह उस तरफ गए भी होंगे तो एक खास मेहमान बनकर। दुश्मन मुल्क कहता है कि उन्होंने मुंबई में कुछ किया तो हम एक सुर में कहते हैं कि पहली बात तो कुछ किया ही नहीं और अगर किया तो तुम्हारे पास सबूत क्या हैं?
विज्ञापन

10 करोड़ अरब का मुकदमा हो

विरोधी जरूर कहेंगे लेकिन उन्हें कहने से पहले दाएं-बाएं ये देखना चाहिए कि जनाब आपने अगर न मुल्क के अंदर जिहाद किया और न ही मुल्क के बाहर तो फिर आप करते क्या हैं। लेकिन अपनों के हाथों मानहानि और उस पर भी सिर्फ 10 करोड़ का मुकदमा? इतने में तो डिफेंस में दो छोटे प्लाट भी नहीं आते।

इस गरीब देश को हिसाब-किताब की कम समझ है। इसने बड़ी गिनती भी सिर्फ दुश्मन देश की फिल्में देखकर सीखी हैं जिसमें हर सौदा, हर रिश्वत हजारों करोड़ों में होती है। हाफिज सईद को चाहिए था कि वह कम से कम दस करोड़ अरब का मुकदमा करते तो दुश्मन देश पर भी धाक बैठती और ख्वाजा आसिफ को भी पता चलता कि उनके विदेश मंत्रालय की ट्रेन असल में कौन चला रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें