जबान पहले बेअदब हुई थी अब गुस्ताख होने लगी है। जिस दिन डॉन अखबार ने रिपोर्ट किया कि राजनेताओं ने जनरलों से दबे लफ्जों में पूछा कि हाफिज सईद का क्या करना है। उसी दिन सत्तारुढ़ पार्टी के एक नेता ने कहा कि हाफिज सईद हमारे लिए कौन से अंडे देते हैं कि हम पूरी दुनिया को जवाब देते फिरें।
अब हमारे विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पूरी दुनिया के सामने कैमरे पर आकर कहा कि हाफिज सईद पाकिस्तान पर बोझ है। उन्होंने कुछ दूसरे गिरोहों के नाम भी लिए लेकिन कल तक हम उन गिरोहों के वजूद से इनकार करते थे।
लेकिन हाफिज सईद तो इस धरती के सपूत हैं और पूरी दुनिया में जाने पहचाने जाते हैं। जब पड़ोसी देश उन्हें दहशतगर्द कहता है तो हमारे दिलों से नारा-ए-तकबीर की आवाज बुलंद होती है। जब हमारा पूर्व सहयोगी उनके सिर पर 10 मिलियन का ईनाम रखता है तो हम उसे सीने का तमगा समझता हैं और पूरी कौम उनके आसपास दीवार बनकर खड़ी हो जाती है।
हाफिज कैसे बने बोझ?
हम एक पारंपरिक और क्रूर समाज हैं जहां विधवाओं, मजदूरों और घर के बुजुर्गों को बोझ समझा जाता है। आखिरी बार हमने हाफिज सईद की तस्वीर देखी तो वह घोड़े पर सवार थे और यकीनन कश्मीर या फलस्तीन या चेचन्या को आजाद करवाने के सफर पर थे।
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पाकिस्तान का पहला मुजाहिदीन इस देश के लिए बोझ कैसे हो गया?
यह तो हाफिज सईद की शराफत है कि उन्होंने यह नहीं कहा कि वह देश पर बोझ नहीं हैं बल्कि ये देश उन पर बोझ है। आखिर उन्होंने कब से इस देश की रक्षा नीति का आधा बोझ अपने कंधों पर उठाया हुआ है।
साथ ही हाफिज सईद की शराफत है कि उन्होंने ये सब कहने की जगह ख्वाजा साहब पर दस करोड़ की मानहानि का दावा किया है। इस पर भी देश पूछता है कि सिर्फ दस करोड़, उससे दस गुना रकम तो अमरीका आप के सिर के लिए देने को तैयार है।