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नवाज की गई कुर्सी, शहबाज होंगे पाकिस्तान के अगले पीएम, भारत के लिए बढ़ा खतरा

Fri, 28 Jul 2017 08:23 PM IST
amarujala.com- presented by: मोहित
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पनामा पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोग्य करार दिए जाने के बाद पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ होंगे। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, नवाज शरीफ के छोटे भाई शहबाज को पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री पद की कमान सौंपी जाएगी।
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  #FLASH Nawaz Sharif's younger brother Shehbaz Sharif to be next prime minister of Pakistan: Pak media pic.twitter.com/Y0lCvSu3di — ANI (@ANI_news) July 28, 2017

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवाज शरीफ को पीएम पद से हटाए जाने के बाद उनके छोटे भाई और पंजाब के सीएम शाहबाज शरीफ के पीएम बनने के कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि, शाहबाज पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य नहीं हैं। इसके चलते उन्हें पीएम बनने के लिए चुनाव लड़ना होगा।
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रिपोर्ट्स में पीएमएल-एन के एक लीडर के हवाले से बताया जा रहा है कि शाहबाज के उप-चुनाव में पीएम चुने जाने तक 45 दिनों के लिए अंतरिम पीएम के रूप में डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ, स्पीकर अयाज सादिक, बिजनेसमैन शाहिद अब्बासी के नाम रेस में हैं।

गौरतलब है कि पाक सुप्रीम कोर्ट ने नवाज को पनामा मामले में दोषी करार दिया है। जिसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। पांच जजों की खंडपीठ ने एकमत से अपना फैसला सुनाया। आपको बता दें कि नवाज और उनके परिवार पर मनीलांड्रिग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पनामा मामले की जांच के लिए जेआईटी गठित की गई थी।
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भारत के लिए बढ़ा खतरा

- फोटो : amar ujala
शहबाज के पीएम बनने से भारत पाकिस्तान के रिश्ते और खराब हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पाक आधारित जिहादी संगठनों द्वारा हथियारों और धन की कमी के बारे में शरीफ सरकार से शिकायतें थी। संगठनों का मानना है कि नवाज के हस्तक्षेप के कारण ही फंडिंग में कटौती हुई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जिहादियों को पैर पसारने के लिए बड़े स्तर पर फिर से फंडिंग हो सकती है जिसका इस्तेमाल कश्मीर को अशांत करने के लिए किया जाएगा।

नवाज इस समय पाकिस्तान के सबसे कद्दावर नेता हैं। उनका पाकिस्तान में सबसे अधिक असर रखने वाले पंजाब प्रांत सहित पूरे पाकिस्तान पर असर रहा है। नवाज को अयोग्य ठहराने के बाद न सिर्फ पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एम) में बल्कि अन्य विपक्षी दलों में भी उनके कद के आसपास भी पहुंचने वाला कोई नेता नहीं है। जाहिर तौर पर ऐसी स्थिति में पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था अंधकारमय होगी और सेना खुद को ज्यादा से ज्यादा मजबूत करने के मंसूबे में कामयाब होगी। ऐसी स्थिति में एक अस्थिर पाकिस्तान स्वाभाविक रूप से भारत की चिंता बढ़ाएगा।

अब वर्तमान परिस्थिति भारत के लिए चुनौती भरी है। इस फैसले के बाद पाकिस्तान में लोकतांत्रिक नेतृत्वहीनता की स्थिति पैदा हो गया है। जाहिर तौर पर अब वहां के शासन-प्रशासन पर सेना का पूरी तरह से परोक्ष कब्जा हो जाएगा।

जहां तक सेना का सवाल है तो भारत के खिलाफ उसका रुख किसी से छिपा नहीं है। तीन युद्घ में बुरी तरह मात खाने के बाद आतंकवाद के जरिए बीते तीन दशक से लड़ा जा रहा परोक्ष युद्घ पाकिस्तान की सेना की उपज है। तमाम अंतर्राष्ट्रीय दबाव के बावजूद पाकिस्तानी सेना ने आतंकवाद को हर तरह की मदद मुहैया कराने में कोई कमी नहीं रखी है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था और कद्दावर नेता के कारण सेना अपनी इस भूमिका को खुल कर नहीं निभा सकती थी, क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतर्राष्ट्रीय दबाव का असर देर सबेर जरूर दिखता है। मगर अब पाकिस्तान परोक्ष रूप से ही सही मगर पूरी तरह से सेना के आगोश में समाता दिख रहा है। निश्चित तौर पर ऐसी स्थिति में पाकिस्तान की सेना भारत के खिलाफ अपने आतंकवादी अभियान को मजबूती से आगे बढ़ा सकता है।
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