पाकिस्तान में तालिबान की गोलियों का शिकार हुई मलाला यूसुफजई को छह सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
मलाला को पाकिस्तान में तालिबान ने उस समय सिर में गोली मारी थी, जब वह स्कूल से घर के रास्ते में थीं। मलाला पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा दिलाए जाने की मुहिम चला रही थीं।
महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली 2011 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता तवाकुल कारमान छह सितंबर को हेग में मलाला को अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार से सम्मानित करेंगी।
पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था डच किड्स राइट फाउंडेशन के प्रमुख मार्क डुलर्ट ने बताया,“ मलाला यूसुफजई 2011 में भी नामांकित हुई थीं, लेकिन इस साल विशेषज्ञ समिति ने सर्वसम्मति से अन्य बच्चों को नामांकित नहीं करने का फैसला किया और अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार मलाला को दिए जाने का फ़ैसला किया।
तालिबान के निशाने पर पिछले साल अक्टूबर में मलाला और उनकी दो सहेलियों पर उस वक्त हमला किया गया था, जब वो स्कूल से अपने घर के रास्ते में थीं।
मलाला को सिर में गोलियां लगी थीं। कुछ दिन पाकिस्तान में इलाज के बाद उन्हें बर्मिंघम के क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल लाया गया। मलाला को सुनने में मदद के लिए एक टाइटेनियम प्लेट डाली गई है।
बीबीसी उर्दू के लिए लिखी गई डायरी से मलाला का नाम सुर्खियों में आया था जिसे वो गुल मकई के नाम से लिखा करती थीं और स्वात घाटी के सामान्य जनजीवन के बारे में बताया करती थीं।
अब वो बर्मिंघम के एजबेस्टन हाई स्कूल में पढ़ रही हैं। मलाला के पिता जियाउद्दीन यूसुफजई को ब्रिटेन के बर्मिंघम में पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास में नौकरी दी गई है और अब मलाला का पूरा परिवार ब्रिटेन में ही रह रहा है।