पाकिस्तान के स्वतंत्र रंगमंच का प्रतीक और भारत के लिए शांति की प्रचारक मदीहा गौहर का बुधवार को लाहौर में निधन हो गया। वह 61 साल की थीं और पिछले तीन सालों से कैंसर से लड़ रही थीं। गौहर पाकिस्तान की जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर 1984 में अजोका थियेटर की स्थापना की थी।
गौहर ने भारत के कई शहरों में भारतीय कलाकारों के साथ मंच साझा किया था। अजोका थियेटर में सामाजिक, मानव अधिकार, महिलाओं की शिक्षा, आनर किलिंग, महिलाओं का ऑपरेशन और धार्मिक अतिवाद के मुद्दे पर कई तरह के नाटक होते रहते हैं। गौहर और उनके नाटक अक्सर पाकिस्तानी कट्टरपंथियों के निशाने पर रहते थे।
टोबा टेक सिंह, एक थी नानी, बुल्हा, लेटर्स टू अंकल सेम, होटल मोहनजोदारो और लो फिर बसंत आया उनके प्रसिद्ध नाटक थे। अजोका थियेटर ने दुनियाभर में अपने कार्यक्रम किये। भारत, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, ईरान, इजिप्ट, यूएस और यूके में अजोका थियेटर ने यादगार कार्यक्रम किये।
अजोका थियेटर का प्रतिनिधित्व करने के लिए गौहर पहली ऐसी पाकिस्तानी थीं जिन्हें प्रीस्टीजियस प्रिंस क्लास अवॉर्ड मिला था। उन्हें 2005 में नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया था।