पूर्व नौसेना कमांडर कुलभूषण जाधव की फाइल फोटो
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भारत और पाकिस्तान करीब 18 साल बाद एक बार फिर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) पहुंचे हैं। कुलभूषण जाधव मामले को लेकर ICJ में सुनवाई जारी है। 11 जजों की बेंच ने इस केस में भारत को पहले अपने दलील रखने का मौका दिया है। भारत ने अपनी दलील में कहा कि पाकिस्तान ने वियाना संधि का उल्लंघन किया और दूसरे पक्ष को मौका ही नहीं दिया गया।
भारत की ओर से डॉ. दीपक मित्तल ने अपनी दलील में कहा कि पाकिस्तान का ये रवैया और फरमान 1964 के वियाना कंवेन्शन का उल्लंघन है। पाकिस्तान ने कॉन्सलूयर एक्सेस देने पर कोई जवाब नहीं दिया। पाकिस्तान इस मामले को अपने देश में 'मुकदमा' कहता है, मगर भारत ने इसे एकतरफा केस ही करार दिया।
भारत ने आरोप लगाया का पाकिस्तान सेना या उसकी सरकार ने इस मुद्दे पर किसी भी बात का कोई जवाब नहीं दिया। पाकिस्तान की ओर से न इस मामले की चार्जशीट, सबूत, फैसला की कॉपी या किसी भी भी प्रकार का कोई दस्तावेज नहीं दिया गया। इसके अलावा पाकिस्तान ने इस मामले से जुड़ी किसी भी बात का जवाब नहीं दिया।
भारत ने कहा कि पाक कोर्ट ने जाधव के ट्रायल को लेकर मजाक किया है। इस बार मामला भारत के कुलभूषण जाधव को एक पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाने के खिलाफ भारत द्वारा आईसीजे का दरवाजा खटखटाए जाने का है, जबकि 18 साल पहले इस्लामाबाद ने अपने एक नौसैनिक विमान को मार गिराए जाने के बाद आईसीजे से हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी।
वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने पक्ष रखते हुए कहा कि हमने 16 बार मदद की गुहार लगाई लेकिन जाधव को काउंसलर मदद नहीं दी गई।उन्होंने कहा कि जाधव के माता-पिता पाकिस्तान जाना चाहते हैं लेकिन पाकिस्तान ने वीजा नहीं दिया। साल्वे ने कहा कि पाकिस्तान ने एक महीने में 18 लोगों को फांसी दी है।