अपने फैसलों की वजह से राजनीति पर बड़ा प्रभाव डालने वाले पकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
इफ्तख़ार चौधरी पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश के पद पर आठ साल का समय गुज़ारने वाले दूसरे मुख्य न्यायाधीश रहे। उन्होंने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश के पद पर आठ साल पाँच महीने और 12 दिन गुज़ारे।
पाकिस्तान में कार्यपालिका और न्यालपालिका अलग होने के बाद पाकिस्तान की न्यालपालिका ने पिछले आठ सालों में बहुत क्रांतिकारी क़दम उठाए। इससे वहाँ हुकूमतों के लिए परेशानी भी हुई।
इन्होंने बहुत से मामलों में स्वयं संज्ञान लिया। बहुत से लोगों को मानना है कि उन्होंने सियासी मामलों में दखलंदाज़ी की और बहुत से लोग मानते हैं कि इन्होंने आम नागरिक को राहत देने का काम किया।
इफ्तख़ार चौधरी के कार्यकाल में क्लिक करें पाकिस्तान के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि अदालत के विशेषाधिकार के हनन का नोटिस जारी हुआ और एक प्रधानमंत्री को अयोग्य घोषित किया गया और एक प्रधानमंत्री पर अदालत में मामला चल रहा है। यह पाकिस्तान के इतिहास में मील के पत्थर की तरह था।
कुछ लोगों का यह भी मानना है कि इफ्तख़ार चौधरी के कार्यकाल में न्यायिक सक्रीयता बढ़ी और कुछ का मानना था कि न्यायपालिका ज़रुरत से अधिक सक्रीय हो गई थी।
इफ्तख़ार चौधरी के फैसलों से सेना के सामने भी बड़े मसले पैदा हुए। क्लिक करें पकिस्तान के इतिहास में यह कभी नहीं हुआ था कि सेना के सचिव को बार बार अदालत में बुलाया जाए या पुलिस के बड़े अधिकारियों को अदालत में पेश होने को कहा जाए।
'सुनहरा दौर'
पकिस्तान में एक धड़े का मानना है कि इफ्तख़ार चौधरी के फैसलों से पाकिस्तान में क़ानून का शासन मज़बूत हुआ।
दूसरे धड़े का मानना है कि उनके द्वारा उठाए गए कदमों से सरकार का काम-काज बाधित हुआ। इफ्तखार चौधरी के फैसलों का पाकिस्तान की राजनीति पर बहुत प्रभाव पड़ा और यह प्रभाव हमेशा रहेगा।
इफ्तख़ार चौधरी का समर्थन करने वाले लोग उनके कार्यकाल को सुनहरा दौर कहते हैं। जबकि उनके आलोचकों का कहना है कि उनके कार्यकाल में हुकूमतें बेबस हो गईं थीं और सरकारी काम रुक गया था।
बड़ी चुनौती
उनके बाद क्लिक करें पाकिस्तान के मुख्यन्यायाधीश का पद संभालने वाले तसद्दुक हुसैन जिलानी वरिष्ठता के हिसाब चुने जा रहे हैं।
उनके सामने न्यायपालिका में इफ्तख़ार चौधरी द्वारा स्थापित किए गए तेवर बरकरार रख पाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
पाकिस्तान में यह आम अवधारणा है कि इफ्तख़ार चौधरी और तसद्दुक हुसैन जिलानी में बहुत फर्क है। तसद्दुक हुसैन जिलानी धीमे मिजाज़ के बताए जाते हैं।
लोगों का यह मानना है कि तसद्दुक हुसैन जिलानी के लिए इफ्तख़ार चौधरी की तरह सरकार, सेना और राजनीतिक दलों की नाराज़गी एक साथ मोल लेना मुश्किल होगा। उनकी वजह से सरकार के सामने बहुत जल्द दिक्कतें भी पेश नहीं आएंगी।
इफ्तख़ार चौधरी के फैसलों की वजह से परवेज़ मुशर्रफ, आसिफ अली ज़रदारी और नवाज़ शरीफ़ की सरकार पर भी प्रभाव पड़ा।