पाकिस्तान में बलूचिस्तान के क्वेटा शहर में एक अस्पताल के भीतर संदिग्ध आत्मघाती हमले में कम से कम 70 लोग मारे गए हैं और सौ से ज्यादा घायल हुए हैं। इस हमले में मारे गए अधिकतर लोग पेशे से वकील थे।
पाकिस्तान तालिबान, तहरीक—ए—तालिबान(टीटीपी) से अलग हुए गुट जमात उल अहरार (जेयूए, आजाद लोगों का समूह) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। वर्तमान में जमात उल अहरार का शुमार पाकिस्तान के सबसे खतरनाक चरमपंथी गुटों में होता है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नेतृत्व और समूह की कार्यप्रणाली को लेकर मतभेदों की वजह से ही पाकिस्तान तालिबान से टूटकर जमात-उल-अहरार बना। 2013 में अमरीकी ड्रोन हमले में हकीमुल्लाह महसूद की मौत के बाद मुल्ला फजलुल्लाह के लिए समर्थन की कमी भी पाकिस्तान तालिबान के टूटने की एक वजह बनी।
जेयूए ने वैचारिक मतभेद का हवाला देते हुए अगस्त 2014 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से अपने रास्ते अलग कर लिए थे। टीटीपी के केंद्रीय नेताओं की पाकिस्तान सरकार से शांति वार्ताओं को लेकर इसके स्थानीय कमांडरों के बीच मतभेद गहरा गए।
इन्हीं मतभेदों के चलते जेयूए का गठन हुआ। 26 अगस्त 2014 को जारी डेढ़ घंटे के वीडियो में जेयूए ने अपने गठन का ऐलान किया था। इस समूह से जुड़े लोगों में अधिकतर पाकिस्तान तालिबान के पूर्व कमांडर हैं, जो अफगानिस्तान से सटे कबीलाई इलाके में सक्रिय हैं।
नवंबर 2014 में जेयूए की वेबसाइट पर मौलाना कासिम खोरसानी और मौलाना उमर खालिद खोरसानी को नेता और उपनेता घोषित किया गया। ओमर खालिद खोरसानी इससे पहले मोहम्मद एजेंसी इलाके में पाकिस्तान तालिबान के प्रमुख था।
इस समूह ने पाकिस्तान में कई बड़े हमले किए हैं
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यह समूह पाकिस्तान में सेना और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाता रहा है। हाल के वर्षों में इस समूह ने पाकिस्तान में कई बड़े हमले किए हैं। इनमें नवंबर 2014 में वाघा सीमा पर हुआ हमला भी है। जमात उल अहरार ने ही लाहौर में हुए धमाकों की जिम्मेदारी ली थी। लाहौर धमाकों की जिम्मेदारी लेते हुए इस संगठन ने कहा कि उसने ईसाइयों के ईस्टर पर्व पर हमला किया है।
मार्च 2015 में लाहौर के एक चर्च पर भी इस संगठन ने हमला किया था, जिसमें 15 लोग मारे गए थे और 70 घायल हुए थे। मार्च 2016 में भी इस संगठन ने ईस्टर के दिन एक पार्क में हमला कर 70 लोगों को मौत की नींद में सुला दिया था। इस समूह ने चारसद्दा जिले की अदालत में हमले की जिम्मेदारी ली थी और इसे पंजाब के पूर्व गवर्नर सलमान तासीर के हत्यारे मुमताज कादरी को फांसी की सजा का बदला बताया था।
सलमान तासीर ने ईशनिंदा कानून के उल्लंघन में जेल भेजी गई ईसाई महिला का बचाव किया था। उनके बॉडीगार्ड मुमताज कादरी ने ही 2011 में उनकी हत्या कर दी थी। जेयूए अपने प्रवक्ता अहसानुल्लाह अहसान के आधिकारिक माने जाने वाले ट्विटर अकाउंट के जरिए ऑनलाइन भी मौजूद है। अहसानुल्लाह अहसान अपने ट्विटर खाते का इस्तेमाल हमलों की जिम्मेदारी लेने और ऐलान करने के लिए करता है।
जेयूए पाकिस्तान का सबसे खतरनाक तालिबान समूह है
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इस साल फरवरी में उन्होंने ट्विटर के जरिए ही इस्लामिक स्टेट (आईएस) के साथ जुड़ने की रिपोर्टों का खंडन किया था। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा था कि जेयूए, अफगान तालिबान नेता मुल्ला उमर के साथ है पर इस्लामिक स्टेट का भी सम्मान करती है।
जून 2015 में ट्विटर ने उनका खाता बंद कर दिया था पर वह नए ट्विटर हैंडल के साथ आ गए। मार्च 2015 में पाकिस्तानी मीडिया ने जेयूए के नेतृत्व में बदलाव की खबर दी थी। रिपोर्टं के मुताबिक जेयूए नेता मौलाना कासिम खोरसानी और उमर खालिद खोरसानी ने पद छोड़ दिया है और उनकी जगह असद आफरीदी कार्यवाहक नेता बना है।
ऑपरेशन थंडर जेएयू ने क्वेटा शहर में किए अपने हमले को उस तुफानी मुहिम (अल राद)का हिस्सा बताया है जो उसने पाकिस्तान में इस्लामी कानून 'शरिया' को लागू करने के लिए छेड़ी हुई है। जेएयू ने इस मुहिम की घोषणा मार्च 2016 में लाहौर धमाकों को सरअंजाम देने के बाद की थी।
जेएयू के प्रवक्ता के अनुसार, 'पाकिस्तान उनकी 'युद्धभूमि' है। ईसाई और यहूदियों समेत तमाम अन्य गैर इस्लामी मत को मानने वाले लोगों ने इस्लाम कबूल नहीं किया है। और न ही यह लोग जजिया देते हैं। ऐसे हालात में ईसाइ,हिंदू और अन्य सभी शांति से कैसे रह सकते हैं। इनके घर और इबादतगाहें भी सुरक्षित नहीं हैं।'
वॉशिंगटन स्थित वुडरो विलसन इंटरनेशनल सेंटर के अनुसार जेयूए पाकिस्तान का सबसे खतरनाक तालिबान समूह है। सेंटर के शोधकर्ता इसके नेता उमर खालिद खोरसानी की तुलना आईएस के नेता अबू बाकर अल बगदादी से करते हैं।