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भरी अदालत से भागे परवेज मुशर्रफ

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पाकिस्तान में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने पूर्व सैन्य राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की गिरफ्तारी का आदेश दिया है।
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अदालत ने यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को गैर कानूनी तरीके से हिरासत में रखने के मामले में दिया है।

मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने परवेज़ मुशर्रफ़ की अंतरिम जमानत को रद्द कर दिया।

बीबीसी संवाददाता शहजाद मलिक ने बताया कि अदालत ने जिस समय यह आदेश दिया, उस समय मुशर्रफ़ अदालत में ही मौजूद थे।

लेकिन इस्लामाबाद थाना पुलिस ने, जहां यह मामला दर्ज है, कोई कार्रवाई नहीं की।

इसके बाद, परवेज़ मुशर्रफ़ के सुरक्षाकर्मी उन्हें अपने साथ लेकर चले गए।

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैन्य शासक जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ को अदालत के सामने पेश होने का आदेश दिया था।

मामला

वकीलों ने अदालत में मांग की थी कि जनरल मुशर्रफ़ पर अपने शासन काल के दौरान आपातकाल लागू करने और 2007 में वरिष्ठ जजों को बर्खास्त करने का मुक़द्दमा चलाया जाना चाहिए।
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हाल ही में, जजों की बर्खास्तगी के मामले पर परवेज़ मुशर्रफ़ ने क्लिक करें बीबीसी से बात करते हुए कहा, "उस वक्त मैं लोकतांत्रिक व्यवस्था को लागू करने की कोशिश कर रहा था और उस कोशिश में कुछ कड़ी कार्रवाइयां करनी पड़ीं, जो मैंने कीं।जजों की बर्ख़ास्तगी का मामला उस वक्त की जरूरत थी, इसलिए ऐसा करना सही था।
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जनरल मुशर्रफ़ को 2008 में सत्ता से हटा दिया गया था जिसके बाद वो विदेश चले गए थे।

लेकिन मई में होने वाले आम चुनाव में शिरकत करने के लिए वो पाकिस्तान लौटे हैं।पर उनका सभी जगह से नामांकन रद्द हो चुका है।

विरोध प्रदर्शन

बीबीसी संवादताता शहजाद मलिक ने बताया है कि मुशर्रफ़ इस्लामाबाद के अपने फ़ार्म हाउस में हैं।

फ़िलहाल पुलिस ने चारों तरफ से उनके घर को घेर रखा है। जबकि फ़ार्म हाउस के बाहर उनके समर्थक नारे लगा रहे हैं।

टेलीविजन में दिखाई जा रही तस्वीरों में भी समर्थकों को नारे लगाते देखा गया है।

कहा जा रहा है कि अब मुशर्रफ़ के पास एक ही रास्ता है और वो है सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का।

मुशर्रफ़ के वकीलों ने आज अदालत में दलील देते हुए कहा था कि मुशर्रफ़ ने जजों की सुरक्षा के लिए नजरबंद किया था।

जबकि सरकारी पक्ष का कहना था कि मुशर्रफ़ ने न सिर्फ जजों को नजरबंद किया था बल्कि उन्होंने न्याय प्रणाली को भी कमजोर किया था।
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