पाकिस्तान और कश्मीर के बीच दशकों से चले आ रहे बार्टर सिस्टम (अदला-बदली प्रणाली) सवालों के घेरे में है। इसको लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसा (एनआईए) ने बार्टर सिस्टम की जांच करने का फैसला किया है। अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स की खबरों के अनुसार बताया जा रहा है कि बार्टर व्यापार के द्वारा पाकिस्तान से अवैध हथियार और वस्तुओं का लेन-देन किया जा रहा है। ये भी पढ़े- सेना प्रमुख बाजवा के दौरे के बाद एलओसी पर ऐसे हुई पाकिस्तान की नापाक साजिश
पाकिस्तान और कश्मीर के बीच बार्टर सिस्टम की जानकारी रखने वालों का कहना है कि इस सिस्टम के जरिये देश की सुरक्षा को लेकर खतरा बना हुआ है, क्योंकि हथियारों और अन्य अवैध वस्तुओं की जांच कर सकने वाले कंटेनर स्कैनर्स की खरीद अधर में लटकी है। ये भी पढ़े- CPEC के बहाने कश्मीर मुद्दे पर हस्ताक्षेप करना चाहता है चीन
अलगावादियों को दिया जाता है पैसा
जानकारों ने बताया कि रक्षा, वित्त और गृह मंत्रालय के बीच स्कैनर की खरीद पर कोई समझौता नहीं हो सका। इसलिए भारत की सर्वोच्च आतंकवाद विरोधी एजेंसी (एएनआई) इसकी जांच करेगी कि कहीं इन रास्तों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों का बढ़ावा देने, अलगावादियों को पैसा या फिर फर्जी सिम कार्ड या फोन देने के लिए तो नहीं किया जा रहा है।
इसके साथी ही एनआईए माल का गलत मूल्यांकन करने और तीसरे देशों के माल को आयात करने को लेकर भी जांच करेगी। कश्मीर पुलिस का कहना है कि हाल के समय में कश्मीर में हिंसा बढ़ने के लिए इस मुद्दे को विभिन्न स्तरों पर उठाया गया है।
चुनिंदा वस्तुओं का कर-मुक्त व्यापार करने की अनुमति
2008 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्वास बहाल करने के लिए जम्मू और कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर कुछ चुनिंदा वस्तुओं का कर-मुक्त व्यापार करने की अनुमति दी थी। इसके लिए सलामाबाद और चक्कन-दा-बाग में दो ट्रेड फसिलिटेशन सेंटर बनाए गए थे। हालांकि, यह व्यापार कश्मीर क्षेत्र में बनने वाली वस्तुओं और उत्पादों के अदला-बदली तक सीमित था।
शुरुआत में टेक्सटाइल, फल, शोल और दुपट्टा का व्यापार शामिल था। मगर बाद में इनमें मेवों और कुछ अन्य वस्तुओं को भी बार्टर में शामिल किया गया था। उस समय यह फैसला किया गया था कि रक्षा मंत्रालय दोनों देशों को ट्रेड फसिलिटेशन सेंटर पर कंटेनर स्कैनर उपलब्ध कराएगी। मगर ये स्कैनर अभी तक खरीदे नहीं गए हैं। इससे इनट्रेड फसिलिटेशन सेंटर से गुजरने वाले वाहनों की जांच करना मुश्किल हो गया है।