कश्मीर के अलावा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का अफगानिस्तान दौरा भी इस हफ्ते सुर्खियों में रहा। प्रधानमंत्री अब्बासी ने शुक्रवार को अफगानिस्तान का एक दिन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और चीफ एक्जीक्यूटिव अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह से मुलाकात की। अखबार नवा-ए-वक्त के अनुसार संयुक्त बयान जारी कर कहा गया कि दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई है कि अफगानिस्तान की समस्या का कोई सैनिक हल संभव नहीं है। नवा-ए-वक्त के मुताबिक, ''दोनों नेताओं ने कहा है कि अफगानिस्तान मसले का सबसे बेहतरीन हल राजनीतिक हल है। अपनी धरती एक दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किए जाने पर सहमति जताई गई।''
अखबार एक्सप्रेस के अनुसार, प्रधानमंत्री अब्बासी के काबुल दौरे पर दोनों नेताओं ने साझा बयान जारी कर कहा है कि दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी से परहेज करेंगे। बयान में ये भी कहा गया है कि दहशतगर्दी दोनों देशों के लिए संयुक्त रूप से खतरा हैं और इससे मिलकर निपटा जाएगा। अखबार दुनिया के अनुसार प्रधानमंत्री अब्बासी के
अफगानिस्तान दौरे के बाद दोनों देशों ने पूरे क्षेत्र में शांति कायम करने के लिए सात सूत्री एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। एक्शन प्लान में दोनों देशों के बीच पैदा होने वाले मुद्दों को शामिल कर लिया गया है। इनमें सबसे खास बात ये है कि दोनों देश अपनी-अपनी धरती को एक दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल नहीं करने देंगे। अखबार दुनिया लिखता है कि एक्शन प्लान को पूरी तरह अमल में लाने के लिए एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया जाएगा।
अब बात पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति की। अखबार जंग के मुताबिक पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने नैब यानी नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो की जमकर आलोचना की है। नवाज शरीफ का कहना था, ''नैब का कानून एक तानाशाह (जनरल परवेज मुशर्रफ) का बनाया हुआ काला कानून है। मुशर्रफ ने मेरे खिलाफ बदले की कार्रवाई करने के लिए ये कानून बनाया था।'' नवाज शरीफ ने कहा कि वो अपनी ही पार्टी के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी से अपील करते हैं कि आंतरिक सरकार के दौरान नई सरकार के गठन तक नैब के कानून को सस्पेंड कर दिया जाए। नवाज शरीफ का दावा है कि नैब कानून का चुनाव के दौरान गलत इस्तेमाल हो सकता है।