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मुंबई हमला: पाक के पूर्व गृह मंत्री का आरोप, बोले- भारत ने सबूतों और तथ्यों को साझा नहीं किया

Sun, 13 May 2018 11:06 PM IST
एजेंसी, इस्लामाबाद
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मुंबई आतंकी हमले पर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के कबूलनामे से पाकिस्तान की चौतरफा फजीहत हो रही है। इसके बाद पाक के पूर्व गृह मंत्री और नवाज की पार्टी पीएमएलएन के नेता चौधरी निसार अली खान ने रविवार को उल्टा आरोप लगाते हुए कहा कि 26/11 मामले की सुनवाई के अंजाम तक पहुंचने में सबसे बड़ी बाधा भारत की जिद और असहयोगी रवैया रहा।

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समाचार पत्र डॉन के मुताबिक, शरीफ के कबूलनामे पर टिप्पणी करते हुए निसार ने कहा, मामले की सुनवाई में हुई देरी के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। निसार के मातहत की पाक की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने मुंबई आतंकी हमले की जांच की थी। 

निसार ने कहा, मैं पूरी जिम्मेदारी से कह सकता हूं कि पाक में मुंबई हमले की सुनवाई में हुई देरी पाक की वजह से नहीं बल्कि भारत के जिद्दी और असहयोगी रवैये के चलते हुई। निसार इन दिनों अपनी पार्टी से असंतुष्ट चल रहे हैं।

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निसार ने दावा किया, जब मुंबई में हमला हुआ तो भारत सरकार के पास घटना से जुड़े 90 फीसदी तथ्य और सबूत थे। हमारी लगातार कोशिशों के बावजूद भारत ने ये सबूत और तथ्य एफआईए और पाकिस्तानी अदालत की जांच समिति से साझा करने से इनकार कर दिया। 

उन्होंने कहा, इस मामले को अंजाम तक पहुंचाने में भारत सरकार की कम दिलचस्पी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने एफआईए को मुंबई हमले में जिंदा पकड़े गए एकमात्र आतंकी अजमल कसाब से पूछताछ की इजाजत नहीं दी। 

कसाब को जल्दबाजी में फांसी पर लटका दिया गया, ताकि दुनिया भर में मुंबई हमले को पाकिस्तान के खिलाफ राजनीतिक हथियार बनाकर इस्तेमाल किया जा सके। निसार ने दावा किया कि पाक ने हर आतंकी घटना को लेकर सूचना साझा करने के मामले में भारत सरकार का सहयोग किया। वहीं भारत ने पाकिस्तान के अंदर होने वाली घटनाओं को लेकर ऐसा नहीं किया।

10 साल सुनवाई नतीजा सिफर 
मुंबई हमले को 10 साल का लंबा वक्त गुजर चुका है। इसके बावजूद पाक में सुनवाई का नतीजा सिफर है। पाक में अभी तक इसके किसी भी संदिग्ध को सजा नहीं हुई है। यह दर्शाता है कि ये मामला कभी पाकिस्तान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं था।

इस दौरान हमले के सात आरोपियों के खिलाफ कई सरकारी अधिकारियों और अन्य लोगों की गवाही हुई है। बावजूद इसके पाकिस्तान इस मामले में किसी नतीजे तक पहुंचने के लिए और सबूत देने की मांग करता रहा है।
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