व्यापारिक असंतुलन से जूझ रहे पाकिस्तान को आखिर इमरान खान कैसे निकालेंगे, यह देखने वाली बात होगी। पाकिस्तान के व्यापारिक घाटे में चीन की सबसे ज्यादा भूमिका है। देश में आयात लगातार बढ़ रहा है, जबकि निर्यात काफी कम है। इसे बढ़ाने के लिए इमरान को कुछ खास सोचना होगा, क्योंकि अगर पिछले वित्तीय वर्ष को देखा जाए तो यहां आयात 60.898 अरब डॉलर पहुंच गया था।
इसके अलावा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भी बन रहा है, जिसके लिए चीन ने पहले ही पाकिस्तान को काफी कर्ज दे रखा है, जबकि अमेरिका हमेशा से इसका विरोध करता आ रहा है। ऐसे में पाकिस्तान इस वक्त काफी दबाव में है और इमरान खान को इन सभी चुनौतियों से पार पाना होगा।
बेकार के खर्चों पर लगानी होगी रोक
इमरान खान के लिए एक और बड़ी चुनौती होगी बेकार के खर्चों पर रोक लगाना, क्योंकि एक तो पाकिस्तान कर्ज के भरोसे ही चल रहा है और ऊपर से मेहमान नवाजी और फिजूल की चीजों पर बहुत ज्यादा खर्च करता है।
चुनाव जीतने के बाद इमरान खान ने सांसदों से अपील भी की थी कि वो बेकार के खर्चों पर लगाम लगाएं। इसके अलावा उन्होंने उस समय प्रधानमंत्री आवास लेने से भी मना कर दिया था। उन्होंने कहा था 'हम प्रधानमंत्री आवास का क्या करेंगे? इस बंगले में रहने में मुझे शर्म महसूस होगी, इसलिए इसे शैक्षिक संस्थान या लोगों के कल्याण के लिए किसी संस्था में तब्दील कर दिया जाए।'
हालांकि बाद में उन्होंने फिर सरकारी बंगले में ही रहने की बात कही है। अब देखना होगा कि वो अपने सांसदों की फिजूलखर्ची पर रोक कैसे लगाते हैं और देशहित में काम कैसे करते हैं?