आपने वो कहावत तो सुनी होगी, 'बैठा बनिया क्या करे, सेर पंसेरी तौले।' आजकल पाकिस्तान की राजनीति में भी यही कुछ हो रहा है।
अभी एक वर्ष पहले यहां आम चुनाव हुए हैं और सिवाय इमरान खान के कोई भी 2018 से पहले आम चुनाव नहीं चाहता।
लेकिन इस वक्त हालत ये है कि जो इमरान खान कर रहे हैं वही दूसरी पार्टियां भी कर रही हैं।
उन्होंने इस्लालमाबाद में धरना क्या दिया कि जमात-ए-इस्लामी और मौलाना फजलुर्रहमान की पार्टी भी धरने की धमकियां देने लगीं।
इमरान खान अपने विरोधियों को 'ओय' करके ललकारने लगे तो बाकियों ने भी इमरान खान और एक-दूसरे को 'अबे ओ' कहना शुरू कर दिया।
पॉप स्टाइल के जिहादी तराने
इमरान खान ने शरीफ सरकार पर दबाव बढाने के लिए हर हफ्ते किसी न किसी शहर में जलसे करने शुरू कर दिए तो बाकी गुटों ने भी जलसों की तारीखें घोषित कर दीं।
इमरान खान के जलसों में उनकी तकरीरों के बीचों-बीच बार-बार गाने बजने लगे तो बाकी संगठन भी अपने-अपने कलाकार मैदान में ले आए।
हद ये है कि हाफिज सईद की जमात-उद-दावा की रैलियों में भी पॉप स्टाइल के जिहादी तराने बज रहे हैं।
'पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी' जो मुझे पारिवारिक राजनीति के अनुसार भारतीय कांग्रेस की छोटी बहन लगती है, उसने भी शनिवार को अपने राहुल भैया यानी बिलावल भुट्टो जरदारी के सियासी करियर का शुरुआती फीता कराची में एक बहुत बडे़ समारोह के अंदर काटा।
और बिलावल ने शब्दों की क्लाशिनकोफ से क्या मोदी, क्या अल्ताफ हुसैन, क्या शरीफ बिरादर, क्या इमरान खान सभी को एक लाइन में खड़ा करके 'भून दिया।'
और 'पीपुल्स पार्टी' के सोनिया गांधी यानी आसिफ अली जरदारी अपने सुपुत्र की निशानेबाजी देख-देख कर मंडप पे बैठे सीना फुलाते रहे।
मीडिया की दीवानगी
एक नवाज शरीफ की मुस्लिम लीग ही बची है जो इस समय नमकीन लस्सी के गिलास पर गिलास चढ़ाकर सो रही है।
राजनीतिक रैलियां, धुआंधार भाषण, लंबे-लंबे दावे और सपनों के शमियाने तानना लोकतंत्र का जेवर माना जाता है, पर ये भी तो पता चले कि कौन किसको किस बात पर क्यों लताड़ रहा है और इस मछली बाजार को सजाने का इस वक्त मकसद क्या है?
चलें, जो खामख्वाह शोर मचा रहे हैं वो मचा ही रहे हैं मगर मीडिया बेगानी शादी में आखिर क्यों दीवाना हुआ जा रहा है।
और इतना दीवाना कि टीवी खोलते ही यूं लगता है कि जैसे उत्तरी वजीरिस्तान में तालिबान के खिलाफ सैनिक ऑपरेशन ब्राजील में हो रहा हो, लाइन ऑफ कंट्रोल पर मुठभेड भारत और पाकिस्तान के बीच नहीं बल्कि थाईलैंड और लाओस की सीमा पर हो रही हो।।
अर्थव्यवस्था पाकिस्तान की नहीं बल्कि पापुआ न्यू गिनी की खराब हो, 18-18 घंटे बिजली पाकिस्तान के चार प्रांतों में नहीं बल्कि फ्लोरिडा और मिशिगन में गायब हो रही हो!
इमरान की धरने वाली छवि
इस वक्त छवि कुछ यूं बन रही है कि जैसे पाकिस्तान में सिवाय इसके कोई समस्या नहीं कि किसका जलसा किसकी रैली से बड़ा था।
किस पार्टी सम्मेलन का डीजे किस गुट के डीजे से ज्यादा प्रोफेशनल है, और किस नेता की गाली किस नेता की गाली से ज्यादा मसालेदार रेटिंग ले रही है।
तो क्या भारतीय गुट और नेता भी चुनाव के बाद इसी तरह टाइम पास करते हैं या कुछ कामधाम भी करते हैं!