अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन करने के लिए इस समय बुरी तरह आलोचना सहनी पड़ रही है। लगभग कंगाल हो चुकी पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को आतंकवाद से लड़ने के नाम पर अमेरिका से मिलने वाली मोटी आर्थिक मदद भी बंद हो गई है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हालिया दिनों में कई बार उसे आतंकवाद से लड़ने के नाम पर धोखा करने के लिए लताड़ चुके हैं। भारत भी आतंकी गतिविधियां बंद करने तक उसके साथ किसी भी तरह की बातचीत करने से इनकार कर चुका है। ऐसे में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के विश्व विजेता कप्तान से प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे इमरान के ताजा बयान को बेहद अहम माना जा रहा है।
वाशिंगटन पोस्ट को दिए इंटरव्यू में इमरान ने कहा, हम 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के आतंकियों पर कार्रवाई करना चाहते हैं। मैंने अपनी सरकार को इस केस की स्थिति जानने के आदेश दिए हैं। इस केस को सुलझाना हमारे लिए जरूरी है, क्योंकि यह एक आतंकी हमला था। भारत में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के बातचीत नहीं शुरू करने के फैसले को लेकर इंटरव्यू के दौरान इमरान खान खासे नाराज दिखे और यहां तक कह गए कि भारत का सत्ताधारी दल मुस्लिम व पाकिस्तान विरोधी है। इमरान ने कहा, उन्होंने (भारत सरकार) मेरी सभी पहल को खारिज कर दिया। हमें उम्मीद है कि चुनाव खत्म होने के बाद हम भारत के साथ फिर से बातचीत शुरू कर सकेंगे।