पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के मामले में इमरान खान ने बृहस्पतिवार को माफी मांग ली। पड़ोसी देश में चुनाव कराने वाली शीर्ष संस्था ने इमरान की माफी को स्वीकार तो कर लिया है लेकिन लगे हाथ उन्हें चेतावनी भी दे डाली कि भविष्य में शब्दों के चयन में सावधानी बरतें।
क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान बृहस्पतिवार को अवमानना के दो मामलों में ईसीपी के समक्ष पेश हुए। दो हफ्ते पहले उनके खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था और उन्हें 26 अक्तूबर तक हाजिर होने को कहा गया था। लेकिन इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह गैर जमानती वारंट को निलंबित कर दिया था।
इसके बावजूद इमरान मुख्य चुनाव आयुक्त और रिटायर्ड जस्टिस सरदार मोहम्मद रजा की अध्यक्षता वाली ईसीपी की पांच सदस्यीय बेंच के समक्ष पेश हुए। गत 24 जनवरी को दिए गए विवादित बयान के मद्देनजर आयोग ने 64 वर्षीय इमरान के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया था।
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के खिलाफ विदेशी फंडिंग का केस दायर करने वाले अकबर बाबर ने याचिका दाखिल कर ईसीपी को बताया था कि इमरान ने उस पर विदेशी फंडिंग के मामले में भेदभाव का आरोप लगाया है।
इस बाबत पीटीआई के चेयरमैन इमरान के वकील ने कहा कि वह पहले ही पीठ के समक्ष माफीनामा पेश कर चुके हैं। लेकिन ईपीसी ने भेदभाव का आरोप लगाने से कुछ माह पहले 20 सितंबर को कराची में दिए गए एक अन्य बयान के लिए इमरान को दूसरा माफीनामा लिखित में देने का निर्देश दिया। साथ ही चेतावनी दी कि भविष्य में बयान देते समय सोच समझकर शब्दों का इस्तेमाल करें।
‘मुझे खुशी है कि चुनाव आयोग ने माफीनामे को स्वीकार कर लिया। मैं राष्ट्रीय संस्थाओं का सम्मान करता हूं और उन्हें विश्वसनीय बनाना चाहता हूं। खासकर मैं ईसीपी को उतना ही विश्वसनीय बनाना चाहता हूं जितना कि भारतीय चुनाव आयोग है, ताकि चुनाव नतीजों को सभी दल स्वीकार करें।’ - इमरान खान, चेयरमैन, पीटीआई