पाकिस्तान के दक्षिणी शहर कराची में दो लावारिस बच्चियों को एक लाइव टेलीविजन शो के दौरान गोद दिए जाने को लेकर विवाद पैदा हो गया है।
कुछ लोगों ने बच्चियों के साथ किसी 'वस्तु' की तरह व्यवहार करने की आलोचना करते हुए कहा है कि ये शो के लिए टीआरपी हासिल करने का एक तरीका है।
वहीं शो के प्रस्तोता का कहना है कि उन्होंने मानवीय कारणों से ऐसा किया है।
इन दो बच्चियों में से एक का नाम फातिमा है, जिसने अपनी जिंदगी के इन चंद दिनों में जितना कष्ट झेला है उतना संभवतः एक आम बच्चा पूरी जिंदगी में नहीं झेलता।
उसकी जिंदगी कराची के कूड़ा घर से शुरू होकर शायद वहीं पर खत्म हो जाती, लेकिन लगता है कि ईश्वर को दया आ गई और उसने एक सामाजिक संगठन को उसके लिए फरिश्ता बनाकर भेजा।
रमजान के पवित्र महीने में प्रसारित होने वाले ‘अमान रमजान’ शो में वैसे तो फातिमा के कष्टों का एक सुखद अंत होते हुए दिखाया गया, लेकिन इस पूरी कवायद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
नेक उद्देश्य
इस शो के प्रस्तोता आमिर लियाकत हुसैन अपने कार्यक्रम के दौरान कार, मोटरसाइकिल और अन्य घरेलू चीजों को बांटने के लिए पहले से ही चर्चित हैं। अब उन्होंने एक और विवाद पैदा कर दिया है।
हालांकि उन्होंने इस पूरी कवायद के पीछे एक नेक उद्देश्य होने की बात कही है।
अपनी वेबसाइट पर खुद को एक महान इंसान करार देने वाले आमिर लियाकत का कहना है, "हम रेटिंग के मामले में पहले से टॉप पर हैं, ये बच्चे न तो कूड़ा हैं और न ही बेकार की चीजें हैं। इसलिए हमने इन्हें कूड़ेदान से उठाकर एक जरूरतमंद दंपति के हवाले किया है।"
कुछ गलत नहीं
एक खचाखच भरे स्टूडियो से इस शो का प्रसारण किया गया। बच्ची के नए पिता रियाजुद्दीन का कहना है कि फातिमा उनकी मां की प्रार्थना का फल है। शो के प्रसारण से एक दिन पहले उनका निधन हो गया।
रियाजुद्दीन और उनकी पत्नी को 14 साल से बच्चे का इंतजार था। उनका कहना है कि मां नहीं बन सकने के कारण कई लोगों ने पत्नी को तलाक देने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
रियाजुद्दीन ने कहा, "शो के दौरान जब उन्होंने बच्ची को गोद में लिया तो उन्हें लगा कि फरिश्ते के रूप में उनके शरीर में एक नई आत्मा का प्रवेश हुआ है। फातिमा से हमें बेहद शांति मिली है।"
रियाजुद्दीन की पत्नी तंजीम का कहना है, "मैंने उसे गोद लिया है, लेकिन मुझे गोद लेने जैसा महसूस नहीं हो रहा है। मुझे लगता है कि फातिमा मेरी अपनी बच्ची है और मैंने इसे जन्म दिया है। ये मेरे लिए ईश्वर का तोहफ़ा है।"
तंजीम के साथ ही चादर ओढ़कर बैठी एक और महिला सोराया बिलकिस भी अब मां कहलाने लगी हैं। दूसरी बच्ची को गोद लेने वाली सोराया और उनके पति ने इस सुख को पाने के लिए 17 वर्षों तक इंतजार किया।
सोराया ने बच्ची सय्यदा जैनब पर निगाहें टिकाते हुए कहा, "इसके कारण मेरी जिंदगी पूरी हो गई है। मैं नहीं बता सकती कि मैं आज कितना खुश हूं, क्योंकि एक दिन कोई बड़ा होकर मुझे मां बुलाएगा।"
इन दोनों दंपतियों का कहना है कि लाइव शो के दौरान बच्चियों को गोद लेने में कुछ भी गलत नहीं है।
अन्य टीवी शोज में हो सकती है कॉपी
इससे गोद लेने वाले उत्साहित होंगे। लेकिन बाल अधिकारों की वकालत करने वालों ने आशंका जाहिर की है कि अन्य टीवी शोज में इसकी कॉपी की जा सकती है।
उनका कहना है कि इस पूरी घटना में गोपनीयता का अभाव है जिससे भविष्य में बच्चे को समाज की छींटाकशी और तानों का शिकार होना पड़ सकता है।
सिंध प्रांत के बाल कल्याण विभाग की निदेशक सीमा जमाली का कहना है, "बच्ची को एक तोहफे की तरह सौंपा गया। हालांकि बच्चियों को माता-पिता मिल गए लेकिन बच्चियों को कार, लैपटॉप या मोटरसाइकिल की तरह दिया गया। यह चुपचाप भी किया जा सकता था।"
इस्लामिक कानून नहीं देता गोद की इजाजत
वैसे तो दोनों दंपतियों ने दुनिया की नजरों के सामने बच्चियों को गोद लिया है, लेकिन इस्लामी कानून में गोद का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में दंपतियों को बच्चियों के कानूनी अभिभावक बनने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ सकता है।
देखा जाय तो ये दोनों बच्चियां बेहद भाग्यशाली हैं क्योंकि उनको नए माता-पिता मिल गए। लेकिन कराची के हर अनाथ बच्चे के लिए ईश्वर फरिश्ता नहीं भेजता। पाकिस्तान के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन द दिल्ली फाउंडेशन के मुताबिक केवल कराची में हर साल 300 से अधिक बच्चे मृत पाए जाते हैं।