ए एस दुलत का कहना है कि दोनों देशों की खुफिया एजेंसी के प्रमुख संयुक्त रूप से एक किताब लिखते हैं तो ये अपने आप में ही अदभुत बात है। आगे उन्होंने कहा कि शांति स्थापित करना मुश्किल जरूर है, लेकिन अगर सही से किया जाये तो इसे स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने ये भी कहा है कि दोनों देशों के बीच गतिरोध को तोड़ने के लिए भारत को पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को दिल्ली आमंत्रित करना चाहिए।
उधर, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सीनेटर रजा रब्बानी ने इस किताब पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। शुक्रवार को इस्लामाबाद में पत्रकारों से बातचीत में शरीफ ने कहा कि दुर्रानी की लिखी इस किताब पर राष्ट्रीय सुरक्षा कमिटी की आपात बैठक बुलाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की जांच के लिए एक विश्वसनीय आयोग का गठन किया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर इस बयान के आने के बाद कई लोग
नवाज शरीफ की हां में हां मिलाते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक की मांग कर रहे हैं। लेकिन कुछ का कहना है कि इसके लिए बंद कमरे में एक कार्यवाही होगी और एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ये मामला खत्म हो जाएगा।