27 दिसंबर 2007 के दिन पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की रावलपिंडी में हत्या कर दी गई। बेनजीर को दुनिया से अलविदा कहे 9 साल बीत चुके हैं। आज भी बेनजीर को पाकिस्तान की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में माना जाता है क्योंकि उनके समर्थक मानते हैं कि बेनजीर की सोच और उनका हौसला उन्हें प्रेरित करता है। जानिए बेनजीर के अलावा ऐसी 7 महिलाओं के बारे में, जिन्होंने अपने बूते पाकिस्तान में अलग जगह बनाई।
1. पाकिस्तान की 'मदर टेरेसा' रूथ फॉ
पाक
वर्ष 1929 में जर्मनी में पैदा हुईं रूथ 50 से ज्यादा सालों से पाकिस्तान में हैं। 1958 में वो आना तो इंडिया चाहती थीं लेकिन वीजा मिलने में देरी की वजह से वो पाकिस्तान चली गईं। तब से वो पाकिस्तान में ही हैं। रूथ ने पाकिस्तान में मेडिकल क्षेत्र में काफी काम किया। ये रूथ की कोशिशों का ही नतीजा था कि 1996 में पाकिस्तान लेप्रोसी पर नियंत्रण करने वाला देश बना।
2010 में पाकिस्तान जब बाढ़ से जूझ रहा था, तब भी रूथ ने ऐसे इलाकों में जाकर प्रभावित लोगों की मदद की थी। शुरुआती दिनों में कराची में लेप्रोसी के मरीजों से मिलने के बारे में रूथ ने बीबीसी को बताया था- ''अगर ये (इनका कष्ट) आपको पहली बार में नहीं चुभता है। तो मुझे नहीं लगता कि ये आपको ये कभी भी चुभेगा।''
2. 'मदर ऑफ पाकिस्तान' बिलकीस ईधी
भारत में कुछ रोज पहले पाकिस्तान से आई गीता चर्चा में थीं। गीता की पाकिस्तान में देखभाल करने वाली बिलकीस ईधी को 'मदर ऑफ पाकिस्तान' माना जाता है। बिलकीस ईधी फाउंडेशन की अब कर्ताधर्ता और अब्दुल सत्तार ईधी की बेगम हैं। बिलकीस और अब्दुल सत्तार ईधी की संस्था अब तक हजारों बच्चों को बचा चुकी है। ये संस्था तमाम नेकी से भरे कामों समेत ऐसे बच्चों को अपने पास ले आती है, जिन्हें लोग सड़क किनारे और गंदगी में अनाथ छोड़ जाते हैं।
बिलकीस ने बीबीसी को बताया था, ''हम झूले लगाते हैं ताकि लोग बच्चों को यहां छोड़कर जाएं, मार न दें। मौलवियों ने शोर करना शुरू कर दिया कि हम नाजायज रिश्तों और बच्चों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कई फतवे भी जारी किए। लेकिन ईधी ने कभी परवाह नहीं की।" आठ जुलाई 2016 को अब्दुल सत्तार ईधी दुनिया में नहीं रहे। लेकिन उनके रहते हुए और मरने के बाद बिलकिस नेक कामों में सक्रिय हैं और पाकिस्तान में काफी लोकप्रिय हैं।
3. समीना बेग
समीना ने 2013 में ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो अब भी रिकॉर्ड है। समीना बेग माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली पाकिस्तानी महिला हैं। समीना बेग के नाम 21 बरस की उम्र में एवरेस्ट पर चढ़ने का रिकॉर्ड भी है।
इसके अलावा समीना पहली पाकिस्तानी महिला हैं, जिन्होंने सेवन समिट्स पर चढ़ाई की है। बीबीसी उर्दू को दिए इंटरव्यू में समीना ने कहा, ''चोटी पर पहुंचने के बाद खुशी से मेरी आंखों में आंसू आ गए थे। मुझे बेहद खुशी हो रही थी।''
4. नोबेल विजेता मलाला यूसुफजई
पाक
पाकिस्तान की पहली महिला नोबेल पुरस्कार विनर मलाला यूसुफजई को अब दुनिया जानती है। बीबीसी उर्दू के लिए मलाला ने गुल मकई नाम से 2009 में डायरी लिखी थी और धमकियों के बावजूद लड़कियों की पढ़ाई के लिए कोशिशें करती रही थीं। इस डायरी से नाराज तालिबान ने 2012 में उन पर जानलेवा हमला किया।
काफी मशक्कत के बाद मलाला यूसुफजई की जान बच पाई। लंदन में इलाज के बाद मलाला अब वहीं बस गई हैं। मलाला की हिम्मत को देखते हुए 2014 में उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मलाला को ये पुरस्कार 17 साल की उम्र में मिला संयुक्त तौर पर दिया गया। तालिबान ने जब मलाला को गोली मारी थी, तब तक वो अपनी पहचान बना चुकी थीं।
5. शरमीन ओबेद, ऑस्कर विनर
शरमीन ओबेद इकलौती पाकिस्तानी हैं, जिन्हें ऑस्कर पुरस्कार मिला है। शरमीन की दो शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री 'ए गर्ल इन द रिवर' और 'सेविंग फेस' को अकेडमी अवॉर्ड मिला। 'ए गर्ल इन द रिवर' में शरमीन ने पाकिस्तान में ऑनर किलिंग के मुद्दे को दिखाया था। ये ऐसा विषय है, जिस पर पाकिस्तान में पहले कम ही बात होती थी। 'सेविंग फेस' में शरमीन ने ऐसी महिलाओं की बात की, जिन पर तेजाब फेंका गया था। शरमीन को पाकिस्तान का दूसरा सम्मानित पुरस्कार हिलाल-ए-इम्तियाज भी मिला है।
6. मुख्तारन माई
मुख्तारन माई उन चंद लोगों में शामिल हैं जिन्होंने बिना झिझके अपने हक के लिए आवाज उठाई। मुख्तारन माई 2002 में पाकिस्तान के मुजफ्फरगढ़ जिले के मीरवाला में मुख्तारन माई का चार लोगों ने रेप किया था। ये भी रिपोर्ट हुआ कि रेप का आदेश पंचायत ने मुख्तारन माई से बदला लेने के लिए दिया था।
मुख्तारन ने रेप के ख़िलाफ आवाज उठाई और सालों तक दोषियों को सजा दिलवाने के लिए केस लड़कर दोषियों को सजा दिलवाई। आज मुख्तारन माई पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया में महिला अधिकारों के लिए आवाज उठाती हैं।
7. असीफा अली भुट्टो
पाकिस्तान में पोलियो अब भी है। वजह है चरमपंथियों की धमकियां और पोलियो दवा पिलाए जाने को लेकर कुछ लोगों का अंधविश्वास। हालांकि पोलियो अभियान शुरू होने से पहले सरकार सुरक्षा मुहैया कराती है लेकिन इसके बावजूद समस्या जस की तस है। असीफा अली भुट्टो बेनजीर भुट्टो की बेटी हैं। असीफा भुट्टो पाकिस्तान में पोलिया खत्म करने के अभियान में असीफा काफी एक्टिव रहती हैं।
वर्ष 1994 में पाकिस्तान में जब पोलियो अभियान शुरू हुआ, तब बेनजीर भुट्टो ने पहली ड्रॉप अपनी बेटी असीफा अली भुट्टो को ही पिलाई थी। इन महिलाओं के अलावा सबीन महमूद, हिना रब्बानी खार और पाकिस्तान की पहली महिला कार्टूनिस्ट निगार नजर भी ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने पाकिस्तानी समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है।