आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को चीन से आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने पहले चार दिवसीय दौरे पर 02 नवंबर को चीन पहुंचे। बता दें कि, रविवार दौरे के तीसरे दिन भी पाकिस्तान को चीन से मदद मिलने के कोई असर नजर नहीं आ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार बीजिंग, आर्थिक संकट से जूझ रहे इस्लामाबाद की तत्काल आर्थिक मदद के नाम पर चुप है। हालांकि, दोनों देशों के प्रधानों ने कई मसलों पर बात की जिनमें भारत का भी जिक्र किया गया।
पाकिस्तान से करीबी रिश्ते का दावा करने वाले चीन यदि इमरान खान के चीन से रवाना होने तक इस्लामाबाद की आर्थिक सहायता करने का ऐलान नहीं कर देता तब तक पाक के पास चीन के इस व्यवहार पर नाराजगी व्यक्त करने का ठोस कारण है।
इसके अलावा, दोनों देशों ने मिलकर भारत और पाकिस्तान के बिगड़े रिश्तों पर सांझा बयान जारी किया है। बयान में कहा कि, चीन पाकिस्तान द्वारा किये जा रहे 'भारत-पाकिस्तान' के बिगड़े रिश्तों को सुधारने के प्रयास का समर्थन करता है।
सांझा बयान में चीन का ये भी कहना है की वह नुक्लिअर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) में पाकिस्तान के लिए भी सीट का समर्थन करता है। हालांकि, चीन ने लगातार भारत को नाभिकीय आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में आने से रोकने के लिए भरपूर कोशिश की है। इसी चलते, पाकिस्तान ने भी चीन से अपनी दोस्ती निभाते हुए क्षेत्रीय सहयोग दक्षिण एशियाई संघ (सार्क) में सक्रिय सांझेदारी का समर्थन किया।
पाकिस्तान के साथ हर कीमत पर अपने रिश्ते अच्छे बनाये रखने के लिए चीन ने अप्रैल में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्टपति जिनपिंग की मुलाकात के दौरान की गयी आपसी दोस्ती ''वुहान स्पीरिट'' तक को नजरअंदाज कर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार चीन की तरफ से पाकिस्तान को 1.5 अरब डॉलर का लोन का प्रस्ताव मिलने की उम्मीद थी। ये लोन और पैकेज छह अरब डॉलर के पैकेज का ही हिस्सा है। हालांकि इस खबर पर चीन की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब देखना ये है की पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के रवाना होने से पहले चीन आर्थिक सहायता की घोषणा करता है या नहीं।