पाकिस्तान के शहर लाहौर में ईशनिंदा के आरोपों में एक स्कूल पर हुए हमले की जांच का आदेश दिया गया है।
हमले की ये घटना बुधवार की है जब सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने स्कूल में तोड़फोड़ और आगजनी की, क्योंकि कहा गया कि एक शिक्षक ने पैगम्बर मोहम्मद का अपमान किया है। संबंधित शिक्षक तभी से कहीं छुपी हैं लेकिन पुलिस ने स्कूल के 77 वर्षीय प्रधानाचार्य को गिरफ्तार कर लिया है।
बीबीसी संवाददाता शाहज़ेब जिलानी के मुताबिक, फारूकी गर्ल्स स्कूल को लाहौर के उम्दा शैक्षणिक संस्थानों में गिना जाता है। हमले के बारे में प्रधानाचार्य के बेटे समीर फारूकी बताते हैं, ''ये घटना स्कूल लगने के बाद के समय की है। ये हैरान करने वाली घटना है। हथियारबंद लोगों की भीड़ स्कूल में घुस आई जिसने तोड़फोड़ और आगजनी की।''
होमवर्क से शुरू हुआ विवाद
फारूकी बताते हैं कि हिंसा की वजह ये थी कि एक महिला शिक्षक ने जो होमवर्क दिया था, उसमें कुछ गड़बड़ थी। शिक्षिका ने जल्दबाजी में एक पुस्तक से इस्लाम से जुड़ी बातें उतारते समय कुछ गलत लिख दिया था जिसे ईद की छुट्टियों के दौरान बच्चों को होमवर्क के लिए दिया गया था।
प्रधानाचार्य की ओर से अदालत में पेश हुए वकील जवाद अशरफ के अनुसार, "इस विवाद से जुड़ी अध्यापिका अरफा इफ्तिखार ने किताब से देखकर लिखते समय गलती से एक पन्ना ज्यादा उलट दिया, जिसकी वजह से अगले पन्ने की चीज़ें उनकी लिखाई में आ गईं। वो पन्ना भिखारियों से जुड़ा था।"
स्कूल प्रशासन का कहना है कि कुछ माता-पिता ने ईशनिंदा की शिकायत की तो उन्होंने संबंधित शिक्षिका को ईद की छुट्टियों के बाद पहले ही दिन नौकरी से हटा भी दिया। लेकिन संवाददाताओं के अनुसार जैसा कि पाकिस्तान में अक्सर होता है, कुछ इस्लामी समूह इससे संतुष्ट नहीं हुए।
अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति बनाई है जिसमें मौलवी और स्थानीय नेता भी शामिल हैं जो इन आरोपों की जांच करेगी। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में यदि स्कूल की भूमिका गड़बड़ नहीं पाई गई तो उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जिन्होंने स्कूल में तोड़फोड़ और आगजनी की है।