पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में एक अम्यूजमेंट पार्क बनाया जा रहा है। ये वहीं जगह है जहां अमेरिकी सेना के अभियान में ओसामा बिन लादेन मारे गए थे। इस इलाके में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ये अम्यूजमेंट पार्क बनाया जा रहा है।
हालांकि इस पार्क का अल-कायदा के पूर्व नेता से कोई संबंध नही हैं। पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में रह रहे ओसामा बिन लादेन एक मई, 2011 को अमेरिकी सेना के एक गुप्त अभियान में मारे गए थे।
खैबर पख्नख्वाह प्रांत के अधिकारियों का कहना है कि इस अम्यूजमेट पार्क में चिड़िया घर, पानी में खेले जाने वाले खेल, छोटे स्तर पर गोल्फ खेलने की सुविधा, रॉक क्लाइम्बिंग और पैरागलाईडिंग क्लब होगा।
इन अधिकारियों के मुताबिक इस क्लब को बनाने में लगभग तीन करोड़ डॉलर खर्च आएगा और इससे बनाने में पांच साल लगेंगे।
निर्माण
लेकिन निजी स्तर पर इस पार्क पर खर्च किया गया तो इसके निर्माण पर खर्च बढ़कर पांच करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है।
समाचार एजेंसी एएफपी को जानकारी देते हुए खैबर पख्तूनख्वाह में पर्यटन और खेल मंत्री सैयद अकील शाह ने बताया कि इस अम्यूजमेंट पार्क में पहले चरण का काम 50 एकड़ से शुरु होगा लेकिन बाद में ये 500 एकड़ में फैल जाएगा।
ऐबटाबाद शहर के जिस परिसर में लादेन रहते थे उसे ध्वस्त कर दिया गया है और ये नया अम्यूज़मेंट पार्क उस स्थान पर नहीं बनाया जाएगा। ये माना जा रहा है कि इस पुराने परिसर पर सरकारी आवास इकाई बनाई जाएगी।
ये अम्यूजमेंट पार्क ऐबटाबाद की सीमा पर बनाया जाएगा ताकि खैबर पख्तूनख्वाह में पर्यटन की सुविधाएं और दुरुस्त की जा सके।
शाह का कहना था कि इस परियोजना का ओसामा बिन लादेन से कोई लेना देना नहीं है और हम यहां पर्यटन और मनोरंजन की सुविधाओं को बढ़ावा देने पर काम कर रहे हैं।
कार्रवाई
इस्लामाबाद से 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐबाटाबाद में अमेरिकी सैनिकों ने पहली और दूसरी मई की दरम्यानी रात में कार्रवाई कर अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार दिया था।
ऐबटाबाद पर अमेरिकी हमले से ना केवल पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों में खटास आई थी बल्कि इससे पाकिस्तान के भीतर सेना और सरकार के बीच भी मतभेद गहरा गए थे।
अल-कायदा के पूर्व प्रमुख ओसामा बिन लादेन को ढूंढ निकालने के अभियान पर ‘जीरो डार्क थर्टी’ नाम की फिल्म भी बनी थी।
इस फिल्म ने अमेरिका में बॉक्स ऑफिस पर पहले तीन दिन में लगभग ढाई करोड़ डॉलर की कमाई की थी लेकिन इस फिल्म का पाकिस्तान में बॉयकॉट किया गया था।