पाकिस्तानी सेना ने वर्ष 1999 की गर्मियों से काफी पहले कारगिल जैसी ही एक अन्य घटना को अंजाम देने की साजिश रची थी। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने सेना के इस मंसूबे पर पानी फेर दिया था।
ऐसा दावा पाकिस्तान के कराची में 1992 से 1994 तक भारत के महावाणिज्य दूत रहे राजीव डोगरा ने अपनी किताब ‘वेयर बॉर्डर्स ब्लीड : ऐन इंसाइडर्स अकाउंट ऑफ इंडो-पाक रिलेशंस’ में की है।
वर्ष 1974 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी डोगरा कई अन्य देशों में राजदूत भी रह चुके हैं। उनका कहना है कि बेनजीर का व्यक्तित्व उदार था और पश्चिम में उनकी शिक्षा-दीक्षा का उन पर असर दिखता था। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया है कि बेनजीर भी पाकिस्तान की निम्न स्तर की खुफिया जानकारी से घिरीं थीं।
सेना के खिलाफ खड़ी हुईं बेनजीर
इस सबके बावजूद वह सेना के खिलाफ खड़ी हुईं। इस कारण उनके कार्यकाल में एक बार कारगिल जैसी घटना से बचा जा सका।
बेनजीर के एक इंटरव्यू का हवाला देते हुए डोगरा ने कहा कि पाक के तत्कालीन डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन मेजर जनरल परवेज मुशर्रफ ने पीएम के सामने श्रीनगर पर कब्जा करने के लिए जंग की गुलाबी तस्वीर पेश की।
बेनजीर ने कहा कि ऐसा होने पर भारत न केवल श्रीनगर से निकलने को कहेगा, बल्कि हमारे कब्जे वाले कश्मीर से भी निकलने को कहेगा क्योंकि यूएन के प्रस्ताव के मुताबिक कश्मीर में जनमत संग्रह के लिए पाक को पहले अपने कब्जे वाले हिस्से से हटना होगा।
डोगरा का कहना है कि पाक में ऐसा कम होता है कि राजनीतिक नेतृत्व सेना की राय के खिलाफ जाए।
नवाज को थी 93 के मुंबई धमाके की जानकारी
डोगरा ने पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बारे में भी कई रोचक राज खोले हैं।
उनका दावा है कि 1999 में प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी की लाहौर यात्रा के वक्त कारगिल में पाक सेना की घुसपैठ के बारे में शरीफ को जानकारी थी। इस दौरे में शरीफ काफी असहज दिखे थे।
उनका यह भी दावा है कि शरीफ को 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम विस्फोटों के बारे में भी जानकारी थी और सच्चाई तो यह है कि उन्होंने इसकी मंजूरी दी थी।
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज ने 1994 में डोगरा को यह बात बताई थी।