पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को सुबूतों के अभाव में बेनजीर भुट्टो की हत्या के मामले में बरी किया जा सकता है। मुशर्रफ के वकील ने कहा कि इस मामले में कई अहम गवाह अपने बयानों से मुकर चुके हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो 2007 में जब रावलपिंडी में एक पार्क में चुनावी रैली को संबोधित कर बाहर आ रही थी तो उनकी हत्या कर दी गई थी। तब 71- वर्षीय मुशर्रफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे और 2008 में उन्होंने अवाम के बड़े दबाव में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
मुशर्रफ पर 2010 में भुट्टो की हत्या में शामिल होने का आरोप लगा था। ‘डॉन’ अखबार के मुताबिक मुशर्रफ के खिलाफ तब चार गवाहों के बयानों के आधार पर मामला दर्ज किया गया था।
मुशरर्फ के खिलाफ एक शब्द भी नहीं!
इन चार गवाहों में पूर्व गृह सचिव सैयद कमाल शाह, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन
सेल (एनसीएमसी) के पूर्व महानिदेशक रिटायर्ड ब्रिगेडियर जावेद इकबाल चीमा,
खुफिया विभाग के पूर्व महानिदेशक रिटायर्ड ब्रिगेडियर एजाज शाह और अमेरिकी
लाबीस्ट मार्क सीगल शामिल थे।
तीनों पाकिस्तानी गवाह मुशर्रफ के शासन में
अहम पदों पर तैनात थे। इन पाकिस्तानी गवाहों में से दो पहले ही अपने पूर्व
बॉस यानी मुशर्रफ को फंसाने वाले अपने बयानों से मुकर गए थे जबकि अभियोजन
पक्ष ने यह कहते हुए एजाज शाह को गवाह के कठघरे में न बुलाने का फैसला किया उसकी गवाही की जरूरत ही नहीं है।
कमाल शाह और चीमा ने इस साल जनवरी
में आतंक-रोधी अदालत के समक्ष अपने बयान दर्ज करा चुके हैं। मुशर्रफ
के वकील इलयास सिद्दीकी ने दावा किया कि शाह और चीमा ने अपनी गवाही में
मुशर्रफ के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा।
बेनजीर कह चुकी थी मुशरर्फ होंगे जिम्मेदार
संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने
एकमात्र गवाह सीगल को पेश करना है। संयुक्त जांच दल (जेआईटी) के मुताबिक
सीगल ने एजाज शाह को हमले के लिए जिम्मेदार बताया था।
उन्होंने मुशर्रफ और
उनके ब्रिगेडियर शाह जैसे बड़े सहयोगियों पर बेनजीर भुट्टो को धमकी देने का
आरोप लगाया था। जेआईटी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि सीगल ने अपने
वक्तव्य में कहा था कि बेनजीर भुट्टो ने 26 अक्टूबर, 2007 को एक ईमेल भेज
कर यह कहा था कि वह खुद को महफूज नहीं महसूस कर रही।
तब बेनजीर ने यह भी
लिखा था कि यदि उन्हें कुछ हो जाता है तो उसके लिए मुशर्रफ को भी जिम्मेदार
ठहराएंगी।