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पाकिस्तान का सबसे जटिल क्षेत्र है बलूचिस्तान: पूर्व राजनयिक

Thu, 18 Aug 2016 02:50 AM IST
एजेंसी, वाशिंगटन
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सांकेतिक चित्र
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अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके हुसेन हक्कानी बलूचिस्तान को पाकिस्तान का सबसे उलझा हुआ और अशांत क्षेत्र मानते हैं जिसके बड़े हिस्से पर सरकार का नियंत्रण नहीं है। 
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अटलांटिक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में हक्कानी ने कहा, ‘बलूचिस्तान सबसे जटिल क्षेत्र है और दुर्भाग्यवश वहां की जनता ही अपनी समस्याओं का हल निकालने की कोशिश करती है। इसमें न तो पाकिस्तानी सेना पूरी तरह दोषी है और न ही सत्ता में बैठे लोगों का भ्रष्ट आचरण। इसके लिए राष्ट्रवादियों या तालिबान की मौजूदगी को ही पूरी तरह दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि यह सब मिलकर इस हालात के लिए जिम्मेदार हैं।’ 

हक्कानी ने  कहा कि बलूचिस्तान के एक बड़े हिस्से पर पाकिस्तान की केंद्र सरकार का जरूरी नियंत्रण नहीं है। पारंपरिक बलूच क्षेत्रों की राष्ट्रीयता के प्रति गहरी सहानुभूति रही है और वे या तो आजाद होना चाहते हैं या स्वायत्त बलूचिस्तान की मांग की करते हैं। 
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बलूचिस्तान के हालात के लिए सभी दोषी

- फोटो : डेमो फोटो
उन्होंने कहा, ‘सेना कई बार कौमी कट्टरपंथियों की मदद से उनका दमन करने की भी कोशिश करती है। इस प्रांत की चुनी गई सरकार को भी पर्याप्त जनादेश नहीं मिला है क्योंकि बलोच पार्टियों ने पिछले चुनाव का बहिष्कार किया था और कई प्रतिनिधियों का चुनाव महज 10, 12 या 15 प्रतिशत के मतदान से हुआ है। लिहाजा बलूच के बहुमत में दिखने वाले ये नेता इस्लामाबाद के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं।’

बलूचिस्तान के आजादी आंदोलन के सवाल पर हक्कानी ने कहा कि यह भारत-पाकिस्तान के विभाजन से ही पूरा हो चुका है जब देश के मुस्लिम बहुल इलाकों को पाकिस्तान में मिलाया गया था। कुछ बलोच नेताओं का कहना है कि बलूचिस्तान को जबरन पाकिस्तान में मिलाया गया। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण पहलू की यहां अनदेखी हो रही है। यह एक संसाधन संपन्न प्रांत है और लोग इन संसाधनों का लाभ उठाने के बजाय पाकिस्तान के अन्य क्षेत्रों में इसे बरबाद कर रहे हैं। पाकिस्तानी सेना को भी स्पष्ट करना होगा कि वह किसे अपना दुश्मन मानती है। एक जेहादी समूह को खड़ा कर दूसरे समूह के खिलाफ लड़ाने के बजाय उसे सभी जेहादी और कट्टरपंथी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। 
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