पाकिस्तान में अयोग्य करार दिए गए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दामाद कैप्टन (रिटायर्ड) मुहम्मद सफदर ने अहमदी मुसलमानों को पाक सेना में भर्ती नकरने का सुझाव देकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
पाकिस्तान में इन दिनों सबसे ज्वलंत मुद्दा अहमदी मुसलमानों के देश में अस्तित्व को लेकर खड़ा बन गया है। सच्चाई यही है कि अहमदी लोग पाकिस्तान की किरकिरी बनते जा रहे हैं, जो अच्छे संकेत नहीं हैं।
पाकिस्तान के प्रसिद्ध द नेशन अखबार ने लिखा है कि चूंकि अहमदी विचारधारा पाक और उसके संविधान के लिए बनती जा रही है, इसलिए इस समुदाय के खिलाफ लोगों में गुस्सा है। मुहम्मद सफदर ने भी इन्हीं कारणों से अहमदी समुदाय की आलोचना की है।
पाक संसद में उन्होंने अहमदी समुदाय पर पाकिस्तान के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया और उन पर सख्त कार्रवाई की मांग की। सफदर ने कहा कि वह नेशनल असेंबली में एक प्रस्ताव लाकर सैन्य सेवाओं में अहमदियों की भर्ती पर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं। सफदर ने कहा कि इस मजहब में जिसमें अल्लाह के लिए जिहाद का कोई जिक्र तक नहीं है।
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पाकिस्तान के उदारपंथियों के मुताबिक सफदर अपने खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से बचने के लिए अहमदियों को ढाल बना रहे हैं। जबकि आलोचक मानते हैं कि सफदर पाकिस्तानी सेना के भीतर मौजूद दक्षिणपंथी ताकतों की खुश करने की कोशिश कर रहे हैं।
कुछ का कहना है कि हाफिज सईद की पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग के बढ़ते समर्थन से नवाज शरीफ की पार्टी घबरा गई है, इसलिए अहमदियों को निशाना बनाया जा रहा है। द नेशन के मुताबिक कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन सफदर की टिप्पणी शरीफ और उनकी पार्टी की छुपी हुई विचारधारा को सामने लाती है।