फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तीन पत्नियां, 33 बच्चे और इसी हफ्ते दो और

विज्ञापन
विज्ञापन
पाकिस्तान के क्वेटा में एक घर। घर में 3 पत्नियों, 19 बेटियों और 14 बेटो के साथ रहते हैं जान मोहम्मद। जान के मुताबिक वो इतने बड़े परिवार से खुश हैं। उनके मुताबिक जितना बड़ा परिवार होगा, उतना ही अच्छा होगा। खुद को 'दिल से जवान बताने' वाले जान को उम्मीद है कि वे इस साल 2 और बेटियों के पिता बन सकते है।
विज्ञापन


उनकी एक पत्नी इसी हफ्ते एक बच्चे को जन्म दे सकती है। डॉक्टर और पेशे से व्यापारी जान कहते हैं कि वो बच्चों का ख्याल खुद रखते हैं। उन्हें इन बच्चों को संभालने में सिर्फ एक समस्या आती है कि वो उनका नाम भूल जाते हैं। जान ने पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबार डान को बताया कि वो बच्चों की पढ़ाई पर हर माह करीब 1 लाख रुपए खर्च करते हैं।
विज्ञापन

'मेरे पास सिर्फ एक भाई था'

कुल 33 बच्चों में से उनको सबसे ज्यादा पसंद है उनकी बेटी शगुफ्ता नसरीन, जो अभी नौंवी कक्षा में पढ़ रही है। शगुफ्ता ने बताया कि जब पापा आ जाते हैं तो जितना जल्दी हो सकता है मैं दरवाजा खोलने की कोशिश करती हूं ताकि पापा को ज्यादा देर तक बाहर न खड़ा रहना पड़े। इतने बड़े परिवार के बारे में लिए गए फैसले के बारे में जब जान से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके पास सिर्फ एक भाई था। जब वो बड़े हुए तो इस सच्चाई से काफी खीझ गए और वो हमेशा से बड़ा परिवार चाहते थे।

दरअसल जान का इतना बड़ा परिवार तब लोगों के सामने आया जब उन्होंने क्वेटा महानगर निगम से अपने बच्चों के लिए 'फॉर्म बी' की कई सारी प्रतिया मांगी। जान की इस मांग को क्वेटा के उपायुक्त ने यह कह कर खारिज कर दिया कि जिस संख्या में उन्होंने फॉर्म बी की मांग की है वो संदेहास्पद है और ज्यादा भी। हालांकि क्वेटा महानगर निगम ने सभी बच्चों को जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दी और उनके पास सबूत के तौर पर 1974 में जारी किया गया राशन कार्ड है।

बड़े परिवारों की चल पड़ी इस परंपरा के बारे में पत्रकार जूफीन टी. इब्राहिम का कहना है कि ऐसे बड़े परिवारों को रेखांकित करने के लिए हमें जनगणना की आवश्यकता है। उन्होंने डान के बताया कि हम दुनिया में बहुत सारे बच्चों को ले आते हैं लेकिन प्रभावी ढ़ंग से उनका पालन पोषण करने में अक्षम रहते हैं। हम एक बच्चा नीति पर नहीं आ सकते लेकिन हमें समझदारी से इस मामले पर सोचना चाहिए और मानसिक बदलाव लाना चाहिए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें