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पाकिस्तान: बिना मुकदमा जेल में बंद

Fri, 25 Jan 2013 08:36 AM IST
बीबीसी हिंदी
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पाकिस्तान ने पहली बार स्वीकार किया है कि उसने करीब 700 संदिग्ध चरमपंथियों को बिना मुकदमे के हिरासत में रखा हुआ है। अटॉर्नी जनरल इरफान कादिर ने कहा कि सभी कैदी अफ़गान सीमा के निकट कबायली इलाके में बंद है।
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उन्होंने कहा कि इलाके में लड़ाई जैसे हालात हैं और इन लोगों को तब तक कारागार में बंद रखा जाएगा जब तक सैन्य कार्रवाई जारी है।

पाकिस्तान की ओर से ये इकरारनामा सुप्रीम कोर्ट में चल रही उन सात संदिग्धों की सुनवाई के दौरान आया जिन्हें वर्ष 2010 में जेल से रिहा किए जाने के बाद गुप्तचर एजेंटों ने पकड़ लिया गया था।

विश्लेषकों का कहना है कि ये मामला प्रशासन के लिए चुनौती है क्योंकि पाकिस्तान में ये धारणा है कि शक्तिशाली गुप्तचर संस्था आईएसआई कानून के बाहर रहकर काम कर सकती है।
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आदियाला सात
इन व्यक्तियों को ‘आदियाला सात’ के नाम से जाना जाता है। इन व्यक्तियों को पिछले साल अदालत में पेश किया गया था जब आईएसआई पर उन्हें जजों के सामने पेश करने का दबाव पड़ा था।

उस वक्त इन चरमपंथियों का स्वास्थ्य काफी खराब था। चार अन्य कैदियों की हिरासत में मौत हो गई थी। अभी ये साफ नहीं है कि ये सभी 700 लोग कब से हिरासत में हैं और इन्हें कब छोड़ा जाएगा।

इरफान कादिर ने बताया कि ये फैसला अधिकारी करेंगे कि इन व्यक्तियों के खिलाफ कब मुकदमा दायर किया जाए।

कादिर ने कहा, “वजीरिस्तान में एक सैन्य ऑपरेशन चल रहा है। कानून के मुताबिक जब तक सैन्य कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती, हम इन 700 लोगों पर मुकदमा नहीं दायर कर सकते, ना ही हम उन्हें छोड़ सकते हैं।”

‘मानवाधिकारों का हनन’
लेकिन पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी ने कहा कि जिन सात लोगों के मामलों की सुनवाई चल रही है, उनके मानवाधिकारों का हनन हो रहा है और उन पर मुकदमा चलना चाहिए।

इफ्तिखार चौधरी ने इरफान कादिर से कहा, “अगर ये लोग अपराधी या फिर चरमपंथी हैं, तो हम नहीं चाहते कि ये रिहा हों। कानून के तहत इन पर मुकदमा चलना चाहिए और आप इन्हें गैर-कानूनी तरीके से कारागार में नहीं रख सकते।”

अदालत ने अधिकारियों को आदेश दिया कि वो हर व्यक्ति से जुड़े सुबूतों के आधार एक रिपोर्ट अदालत में पेश करें।
मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दिसंबर में पाकिस्तान पर मनमाने तरीके से हजारों पुरुषों और लड़कों को हिरासत में लेने का आरोप लगाया था।

एमनेस्टी के मुताबिक हिरासत में लिए गए कई लोगों को यातनाएं दी गईं, लेकिन पाकिस्तान की सेना ने एमनेस्टी की रिपोर्ट को ‘झूठों का पुलिंदा’ कह कर खारिज कर दिया था।
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