वर्ष 2008 में मुंबई पर हुए 26/11 हमला मामले में शनिवार को अभियोजन पक्ष के पांच गवाहों ने पाकिस्तान की आतंकवाद निरोधक अदालत के सामने अपने बयान दर्ज कराए। अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सभी ने हमलावरों को मिले आतंकी प्रशिक्षण के बारे में अदालत को जानकारी दी। गवाही देनें में वालों में संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के खुफिया अधिकारी और गुप्तचरों सहित अन्य लोग शामिल हैं। इन सभी लोगों ने रावलपिंडी की आदिला जेल स्थित आतंकवाद निरोधक अदालत के न्यायाधीश चौधरी हबीब-उर-रेहमान के सामने उपस्थित होकर बंद कमरे में अपना बयान दर्ज कराया।
गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद जज ने सुनवाई को आगामी 13 अक्तूबर तक के लिए टाल दिया। सुनवाई से जुडे़ सूत्रों ने बताया कि गवाहों ने अदालत को उन प्रशिक्षण शिविरों की जानकारी दी, जहां मुंबई पर हमला करने वाले लोगों को हमले के लिए तैयार किया गया था। एफआईए के विशेष अभियोजक चौधरी जुल्फिकार अली ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि वह आज की कार्रवाई के संबंध में कोई बात नहीं कर सकते, क्योंकि यह मामला देशहित से जुड़ा है।
हालांकि सूत्रों ने बताया कि पांचों लोगों की ज्यादातर गवाही प्रशिक्षण शिविरों के संबंध में ही हुई। गवाही की इससे ज्यादा जानकारी तत्काल में नहीं मिल पाई। मालूम हो कि शुक्रवार को हुई एक जन सुनवाई के दौरान एफआईए के पूर्व प्रमुख तारिक खोसा ने बताया था कि गुप्तचरों ने लश्कर के दो प्रशिक्षण शिविरों का पता लगाया था, जहां मुंबई हमलावरों को ट्रेनिंग दी गई थी।
यही नहीं खोसा ने यह भी बताया था कि जांच एजेंसी ने उस नाव को भी खोज निकालने में सफलता हासिल की थी, जिसकी मदद से 10 आतंकियों ने मुंबई हमले को अंजाम देन के लिए कराची से भारत जलीय सीमा का सफर किया था। मालूम हो कि खोसा की ही निगरानी में मुंबई हमला मामले की जांच चल रही है।