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मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने का नहीं करेगा विरोध, पाकिस्तान ने दिया संकेत

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Tue, 05 Mar 2019 09:29 AM IST
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masood azhar

भारत और पाकिस्तान में तनाव के बीच अब खबर आई है कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जैश सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने का विरोध नहीं करेगा। पाकिस्तान की कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी ये दावा किया गया है कि पाकिस्तान की इमरान खान सरकार अब अपना विरोध वापस ले सकती है। 

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबकि पाकिस्तान के एक अधिकारी का कहना है कि मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला 14 फरवरी को हुए पुलवामा आत्मघाती हमले से पहले ही लिया गया था। 



अधिकारी का कहना है, "सरकार को यह तय करना होगा कि एक व्यक्ति महत्वपूर्ण है या देश का राष्ट्रीय हित।" उसने यह साफ कहा कि ये फैसला भारत के इस्लामाबाद पर बनाए गए दबाव के कारण नहीं लिया गया है। जिसमें भारत का कहना है कि पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी जैश ने ली है लेकिन पाकिस्तान इस बात को मानने को तैयार नहीं है। भारत ने पाकिस्तान को सबूत भी सौंपे हैं लेकिन वो फिर भी सबूतों की ही मांग कर रहा है।

इससे पहले एक इंटरव्यू में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि अजहर पाकिस्तान में है और काफी बीमार है। वह अपने घर से निकल भी नहीं सकता। विदेशी न्यूज चैनल को दिए जा रहे इंटरव्यू में कुरैशी ने कहा था कि जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। उन्होंने कहा था, "पाकिस्तान को यकीन नहीं है कि पुलवामा हमले में जैश शामिल था।" 

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भारत और पाकिस्तान में तनाव के बीच अब खबर आई है कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जैश सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने का विरोध नहीं करेगा। पाकिस्तान की कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी ये दावा किया गया है कि पाकिस्तान की इमरान खान सरकार अब अपना विरोध वापस ले सकती है। 

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबकि पाकिस्तान के एक अधिकारी का कहना है कि मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला 14 फरवरी को हुए पुलवामा आत्मघाती हमले से पहले ही लिया गया था। 

अधिकारी का कहना है, "सरकार को यह तय करना होगा कि एक व्यक्ति महत्वपूर्ण है या देश का राष्ट्रीय हित।" उसने यह साफ कहा कि ये फैसला भारत के इस्लामाबाद पर बनाए गए दबाव के कारण नहीं लिया गया है। जिसमें भारत का कहना है कि पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी जैश ने ली है लेकिन पाकिस्तान इस बात को मानने को तैयार नहीं है। भारत ने पाकिस्तान को सबूत भी सौंपे हैं लेकिन वो फिर भी सबूतों की ही मांग कर रहा है।

इससे पहले एक इंटरव्यू में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि अजहर पाकिस्तान में है और काफी बीमार है। वह अपने घर से निकल भी नहीं सकता। विदेशी न्यूज चैनल को दिए जा रहे इंटरव्यू में कुरैशी ने कहा था कि जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। उन्होंने कहा था, "पाकिस्तान को यकीन नहीं है कि पुलवामा हमले में जैश शामिल था।" 

Shah Mehmood Qureshi
जब इंटरव्यू लेने वाले ने कहा कि जैश ने पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली है, तो कुरैशी ने कहा, "उन्होंने जिम्मेदारी नहीं ली है। इसमें अभी भी असमंजस है।" पुलवामा हमले के बाद भारत ने आतंक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के बालाकोट स्थित आतंकी ठिकानों पर 26 फरवरी को हवाई हमला किया था। जिसके बाद अमेरिका, फ्रांस और यूरोपीय संघ समेत पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान पर दबाव बनाने लगा कि वह आतंकियों को पनाह देना बंद करे। 

जियो टीवी को दिए एक इंटरव्यू में कुरैशी ने कहा, "अब वक्त आ गया है कि पाकिस्तान को अपने हितों को लेकर फैसला करना ही होगा। हम वही करेंगे, जो हमारे हित में होगा।"

कुरैशी से जब पूछा गया कि पाक का करीबी चीन इस मुद्दे पर क्या फिर से वीटो करेगा, तो उन्होंने कहा, "हम पाकिस्तान के हितों को लेकर सभी पार्टियों के बीच एकराय कायम करने की कोशिश करेंगे। हमारी कुछ वैश्विक प्रतिबद्धताएं हैं। हम जो भी कार्रवाई करेंगे, उससे विश्व में हमारी छवि को कोई भी नुकसान नहीं होगा।"

हाल ही में फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में एक नया प्रस्ताव रखा है। संयुक्त राष्ट्र को सौंपे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि दुनिया में कहीं भी अजहर के आने-जाने, हथियार खरीदने पर रोक लगाई जाए और उसकी संपत्ति कब्जे में कर ली जाए। इस नए प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सेंक्शन कमेटी 10 दिन में स्वीकार करेगी। 

कुरैशी ने कहा कि वह भारत से युद्ध नहीं बल्कि शांति चाहते हैं। वहीं पाकिस्तान की सरकार ने उन सभी संगठनों की संपत्ति सीज करने का आदेश दिया है, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित सूचि में डाला हुआ है। यानि अब इस संपत्ति पर सरकार का नियंत्रण होगा। 
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