फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pakistan Train Attack: 'धमाका, गोलीबारी, वो तबाही का मंजर था', हमले को याद कर यात्रियों ने बताई आपबीती

Wed, 12 Mar 2025 01:07 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

एक यात्री ने कहा कि 'एक तेज धमाका हुआ और इसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई। गोलीबारी करीब एक घंटा तक जारी रही। यह ऐसा मंजर था, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।' 
विज्ञापन
पाकिस्तान सेना चला रही बचाव अभियान - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में रेल पर हुए हमले को 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोग बलोच विद्रोहियों के कब्जे में हैं। पाकिस्तान की सेना बंधकों को छुड़ाने का अभियान चला रही है। इस बीच इस हमले में बचे लोग अभी भी उस डर से बाहर नहीं निकल पाए हैं। हमले में बचे एक यात्री मुश्ताक मोहम्मद ने बताया कि 'हमले के वक्त तेज धमाका हुआ और गोलियां चलने लगीं। वो ऐसा दृश्य था, जो कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।'
विज्ञापन


बलूच विद्रोहियों ने ट्रेन की अगवा
बलूच विद्रोहियों ने मंगलवार को बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा से करीब 100 किलोमीटर दूर बोलन स्टेशन के नजदीक एक ट्रेन जाफर एक्सप्रेस को हथियारों के दम पर अगवा कर लिया। इस हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली है।  मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बलूच लड़ाकों के हमले में 20 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। वहीं पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि सुरक्षा बलों ने 155 बंधकों को रिहा करा लिया है और सेना की जवाबी कार्रवाई में 27 बलूच लड़ाके मारे गए हैं। बलूच लड़ाकों ने बलूचिस्तान की महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को छोड़ दिया, जबकि ट्रेन में सवार सेना और सुरक्षाबल के जवानों को बंधक बना लिया। 

ये भी पढ़ें- क्या है बलूच लिबरेशन आर्मी?: जिसने पाकिस्तान में ट्रेन हाईजैक की, क्या रही सरकार से इनकी मांग, विचारधारा क्या?
विज्ञापन


क्या बोले हमले में जिंदा बचे लोग
हमले के वक्त जाफर एक्सप्रेस के नौ डिब्बों में करीब 500 यात्री सवार थे। यह रेल क्वेटा से पेशावर जा रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुश्ताक ने बताया कि हमले के वक्त वे और उनका परिवार ट्रेन के तीसरे कोच में थे। उन्होंने कहा कि 'एक तेज धमाका हुआ और इसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई। गोलीबारी करीब एक घंटा तक जारी रही। यह ऐसा मंजर था, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।' एक अन्य यात्री इशाक नूर ने बताया कि वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ क्वेटा से रावलपिंडी जा रहा था। नूर ने कहा 'धमाका इतना तेज था कि ट्रेन की कई खिड़की और दरवाजे भी टूट गए।' 
संबंधित वीडियो


बलूचिस्तान के लोगों को जाने दिया
मुश्ताक ने बताया कि गोलीबारी के बाद नकाबपोश लोग रेल की बोगियों में चढ़े और उन्होंने लोगों के आईडी कार्ड जांचने शुरू कर दिए। बीएलए के लड़ाकों ने यात्रियों से कहा कि वे आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों के साथ ही बलूच नागरिकों को कुछ नहीं कहेंगे। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति ने लड़ाकों का सामना करने की कोशिश की तो उन्होंने उसे बुरी तरह पीटा और ट्रेन के नीचे उतारकर गोली मार दी। इशाक ने बताया कि जब मैंने लड़ाकों को बताया कि मैं बलूचिस्तान का निवासी हूं तो उन्होंने मुझे मेरे परिवार के साथ जाने दिया। 
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- पाक ट्रेन हाईजैक: बलूच आर्मी ने 20 सैन्य कर्मियों की हत्या का किया दावा, यात्रियों को बचाने में जुटी सरकार

बलूच लड़ाकों द्वारा छोड़े गए एक यात्री ने बताया कि हम लोग रिहा किए जाने के बाद पैदल ही करीब तीन घंटे में नजदीकी पनीर स्टेशन पहुंचे। एक यात्री ने बताया कि वह तबाही का मंजर था और लोग बहुत डरे हुए थे। एक यात्री ने बताया कि मेरे अनुमान के मुताबिक करीब 250 लोगों को बंधक बनाया गया और लड़ाकों की संख्या करीब 1100 थी। 

संबंधित वीडियो

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें