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Pakistan: PTI नेताओं की सोशल मीडिया प्रोफाइल की फॉरेंसिक जांच क्यों? जानें विवादों में फंसे इमरान का क्या होगा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sat, 17 Jun 2023 05:42 PM IST

सार

इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के नेताओं के इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर से कुल 23 लिंक एफआईए को भेजे गए हैं। एफआईए संघीय अपराधों की जांच करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की प्रमुख एजेंसी है। नेताओं के बयान भी नौ मई की हिंसा के मामलों पर संयुक्त जांच दल की अंतिम रिपोर्ट का हिस्सा होंगे। 
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इमरान खान - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। एक के बाद एक परेशानियों के बाद अब पीटीआई नेताओं की सोशल मीडिया पोस्ट भी उनकी नींदें उड़ा सकती हैं। दरअसल, पाकिस्तान सरकार ने इमरान खान और उनकी पार्टी के कई अन्य नेताओं के सोशल मीडिया प्रोफाइल को संघीय जांच एजेंसी (FIA) के साथ साझा किया है। एजेंसी 8 मार्च से 9 मई के बीच 'विवादास्पद देश विरोधी सामग्री' साझा करने के लिए फॉरेंसिक जांच करेगी। 

पिछले कई महीनों से इमरान खान अदालती कार्रवाई में उलझे हुए हैं। इस बीच उनकी गिरफ्तारी भी हुई। ऐसे में जानना जरूरी है कि इमरान खान के लिए नई मुश्किल क्या है? सोशल मीडिया प्रोफाइल की फॉरेंसिक जांच क्यों की जा रही है? सरकार क्या कह रही है? इमरान के लिए क्या यही एकलौती परेशानी है? 
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इमरान खान - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। एक के बाद एक परेशानियों के बाद अब पीटीआई नेताओं की सोशल मीडिया पोस्ट भी उनकी नींदें उड़ा सकती हैं। दरअसल, पाकिस्तान सरकार ने इमरान खान और उनकी पार्टी के कई अन्य नेताओं के सोशल मीडिया प्रोफाइल को संघीय जांच एजेंसी (FIA) के साथ साझा किया है। एजेंसी 8 मार्च से 9 मई के बीच 'विवादास्पद देश विरोधी सामग्री' साझा करने के लिए फॉरेंसिक जांच करेगी। 

पिछले कई महीनों से इमरान खान अदालती कार्रवाई में उलझे हुए हैं। इस बीच उनकी गिरफ्तारी भी हुई। ऐसे में जानना जरूरी है कि इमरान खान के लिए नई मुश्किल क्या है? सोशल मीडिया प्रोफाइल की फॉरेंसिक जांच क्यों की जा रही है? सरकार क्या कह रही है? इमरान के लिए क्या यही एकलौती परेशानी है? 

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : अमर उजाला
इमरान खान के लिए नई मुश्किल क्या है?
इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के नेताओं के इंस्टाग्राम, फेसबुक और ट्विटर से कुल 23 लिंक एफआईए को भेजे गए हैं। एफआईए संघीय अपराधों की जांच करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की प्रमुख एजेंसी है। साझा किए गए लिंक पीटीआई नेताओं शाह महमूद कुरैशी, मुराद सईद और हम्माद अजहर के वीडियो और पोस्ट पर आधारित हैं। इनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। नेताओं के बयान भी नौ मई की हिंसा के मामलों पर संयुक्त जांच दल की अंतिम रिपोर्ट का हिस्सा होंगे। 

इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में विरोध-प्रदर्शन। - फोटो : सोशल मीडिया
सोशल मीडिया प्रोफाइल की फॉरेंसिक जांच क्यों की जा रही है?
सोशल मीडिया प्रोफाइल की फॉरेंसिक जांच की वजह है नौ मई को हुई देशव्यापी हिंसा। दरअसल, नौ मई को इस्लामाबाद में अर्धसैनिक रेंजरों द्वारा भ्रष्टाचार के एक मामले में 70 वर्षीय इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हिंसक विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे। हालांकि, इमरान को बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था। उनकी पार्टी पीटीआई के कार्यकर्ताओं ने लाहौर कॉर्प्स कमांडर हाउस, मियांवाली एयरबेस और फैसलाबाद में आईएसआई भवन सहित 20 से अधिक सैन्य प्रतिष्ठानों और सरकारी भवनों में तोड़फोड़ की थी। साथ ही रावलपिंडी में सेना मुख्यालय पर भी पहली बार भीड़ ने हमला किया था। अब इन्हीं घटनाओं की जांच की जा रही है। आरोप है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके युवाओं को देश के खिलाफ भड़काया गया। लिंक की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने पर इसे जांच रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाएगा। 

इस्लामाबाद हाईकोर्ट के बाहर इमरान समर्थक। - फोटो : सोशल मीडिया
इस पर सरकार का क्या कहना है?
पाकिस्तान में नौ मई की हिंसा के पीछे सरकार इमरान और उनके समर्थकों को दोषी मान रही है। पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने हाल ही में कहा कि सरकार ने इस जघन्य अपराध में शामिल दोषियों के लिए किसी भी तरह की नरमी से इनकार किया। सूबे के कार्यवाहक मुख्यमंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि नौ मई को हुई हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार संदिग्धों पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत रोजाना जेल में सुनवाई होगी। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को जेल में मुकदमे की सुनवाई के बारे में सूचित कर दिया गया है। 

उन्होंने पुलिस और अभियोजन विभागों को आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने का निर्देश देते हुए कहा कि हम नौ मई के हमलों में शामिल दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में तेजी लाना चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस जघन्य अपराध में शामिल किसी भी अपराधी के प्रति नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज करने के आदेश दिए गए हैं। 

इमरान खान, फवाद चौधरी (फाइल) - फोटो : Social Media
इमरान के लिए क्या यही एकलौती परेशानी है? 
इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) इन दिनों अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर में है। अल कादिर ट्रस्ट केस में इमरान की गिरफ्तारी के बाद से पीटीआई के 80 से अधिक नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। वहीं, कुछ नेताओं ने तो राजनीति से ही संन्यास का एलान कर दिया है। नौ मई को इमरान खान की गिरफ्तारी और उसके बाद हुई हिंसा के बाद से ही ये सिलसिला चल रहा है। पार्टी छोड़ने वालों में इमरान के करीबी पूर्व मंत्री असद उमर, शिरीन मजारी, फवाद चौधरी और फिरदौस आशिक अवान जैसे नाम शामिल हैं। कहा ये भी जा रहा है कि आने वाले दिनों में पीटीआई के पहले, दूसरे और तीसरे स्तर के कई और नेता भी इस्तीफा दे सकते हैं। 

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : सोशल मीडिया
1600 से ज्यादा नेता और कार्यकर्ता जेल में 
इस्तीफे के अलावा पार्टी के प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी ने इमरान को परेशानियों को और बढ़ा दिया है। इमरान के साथ मजबूती से खड़े रहने वाले पार्टी के उपाध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी सहित कई अन्य पीटीआई नेता इस वक्त जेल में बंद हैं। नौ मई के दंगों के बाद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के 3,000 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। हालांकि, उनमें से 1,400 संदिग्धों को सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया गया है।

इस्लामाबाद में पीटीआई समर्थक - फोटो : Agency (File Photo)
पीटीआई पर मंडरा रहा है प्रतिबंध का संकट 
हिंसक घटनाओं के बाद पाकिस्तान की गठबंधन सरकार के कई नेताओं ने 27 साल पुरानी पार्टी पर प्रतिबंध लगाने के संकेत भी दिए। गठबंधन सरकार की पार्टियों पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पाकिस्तान-फजल (जेयूआई-एफ) ने अतिवाद और हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा समर्थित पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया था। 
इन हमलों के बाद रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संकेत दिया था कि सत्तारूढ़ गठबंधन जल्द ही संसद में पीटीआई पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पेश करेगा। आसिफ ने कहा था कि संघीय सरकार के सभी गठबंधन सहयोगियों को इस मुद्दे पर साथ लिया जाएगा।
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