शहबाज शरीफ सरकार अमेरिका से मिल रहे संकेतों से परेशान है। यहां आम धारणा बनी है कि अमेरिका सरकार परोक्ष रूप से पाकिस्तान सरकार को उसके भटकावों को लेकर आगाह कर रही है। कई पर्यवेक्षक इस घटनाक्रम को अमेरिका और चीन से साथ-साथ सौदेबाजी करने की शहबाज शरीफ सरकार के रुख से जोड़ कर देख रहे हैँ।
पूर्व अमेरिकी राजनयिक जालमी खलीजाद दो बार ऐसी बातें कह चुके हैं, जिन्हें पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों में दखल समझा गया है। बाइडन प्रशासन ने अपनी औपचारिक बयान में खलीजाद की इन टिप्पणियों को उनका निजी विचार बता कर खुद को अलग दिखाने की कोशिश की है। लेकिन पर्यवेक्षक पाकिस्तान की अंदरूनी घटनाओं पर खलीजाद की टिप्पणियां को सिर्फ इस रूप में देखने को तैयार नहीं हैं।
खलीजाद अमेरिका के वरिष्ठ राजनयिक रह चुके हैं। वे उस समय अफगानिस्तान मामलों में अमेरिका सरकार के मुख्य सलाहकार थे, जब वहां अमेरिकी सेना बड़े युद्ध अभियानों में जुटी हुई थी। अपने ताजा बयान में खलीजाद ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बारे में गृह मंत्री राना सलाउल्लाह की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है। सनाउल्लाह ने कहा था कि अब ‘या तो इमरान खान रहेंगे या मैं (यानी सनाउल्लाह)।’ खलीजाद ने इस बयान को हिंसा भड़काने की कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि कानून का पालन करने वाले हर पाकिस्तानी को ऐसे बयानों को ठुकरा देना चाहिए।
हाल में दिए एक इंटरव्यू में सनाउल्लाह ने कहा था कि अब देश में सियासी हालत उस मुकाम पर पहुंच गई है, जिसमें सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) इमरान खान से अपना वजूद बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। इस बयान का उल्लेख करते हुए खलीजाद ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को सलाह दी है कि उन्हें ऐसी टिप्पणियों से खुद को अलग करने का सार्वजनिक एलान करना चाहिए। खलीजाद ने कहा- ‘अगर ऐसे तौर-तरीके नहीं बदले, तो पाकिस्तान संकट में लगातार फंसा रहेगा।’
इसके पहले भी खलीजाद ऐसी टिप्पणियां कर चुके हैं। इसे लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सार्वजनिक बयान जारी किया था। उसमें कहा गया था कि खलीजाद को पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में दखल देने से बचना चाहिए। लेकिन ऐसा लगता नहीं है कि पाकिस्तान सरकार की इस चेतावनी का खलीजाद पर कोई असर हुआ है। उन्होंने इमरान खान के समर्थन में बयान देना जारी रखा है।
वॉशिंगटन में मंगलवार को इस बारे में विदेश मंत्रालय के उप प्रमुख प्रवक्ता वेदांत पटेल से सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि खलीजाद एक स्वतंत्र नागरिक हैं और उनके विचार अमेरिका की विदेश नीति की नुमाइंदगी नहीं करते। एक पाकिस्तानी टीवी चैनल के पत्रकार ने यह सवाल पूछा। उन्होंने कहा- पाकिस्तान में आम धारणा है कि खलीजाद अमेरिका सरकार की भावनाओं को व्यक्त कर रहे हैं। इस पर पटेल ने कहा- पूर्व राजनयिक सोशल मीडिया पर या अपनी टिप्पणियों में जो भी कहते हैं, वे वैसा अपनी निजी हैसियत से कहते हैं। वे अमेरिका सरकार की तरफ नहीं बोलते हैं।
मगर पाकिस्तान में आम चर्चा यही है कि खलीजाद के जरिए जो बाइडंन प्रशासन शहबाज शरीफ को आगाह कर रहा है। इसके जरिए संकेत दिया जा रहा है कि अमेरिका आगे चल कर इमरान खान पर अपना दांव लगा सकता है।