आतंकियों का सरपरस्त पाकिस्तानी
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अमेरिका में पूर्ववर्ती बराक ओबामा सरकार में राजनयिक रहीं एलिसा आयरेस ने अमेरिकी सांसदों से कहा कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में यथास्थिति बदलने के लिए आतंकवादी समूहों का सहारा लिया, जिससे वहां शांति की हर कोशिश कमजोर हुई और मानवाधिकार पर नकारात्मक असर पड़ा। विदेश संबंध परिषद में भारत, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया संबंधी मामलों की विशेषज्ञ आयरेस ने प्रतिनिधि सभा में विदेश मामलों की समिति के तहत एशिया-प्रशांत एवं परमाणु अप्रसार उपसमिति से कहा कि कश्मीर में स्थिति जटिल और दुखद है।
आयरेस ने कहा कि इस बात के लिखित दस्तावेज हैं कि पाकिस्तान के आतंकी कश्मीर में सक्रिय रहे हैं और कश्मीर के लोग एवं भारत सरकार इस क्षेत्र में आतंकवाद की कड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। आयरेस ने अमेरिकी सांसदों से कश्मीर में लंबे समय से पीड़ित कश्मीरी पंडितों का भी जिक्र किया जिन्हें 90 के दशक में उनके अपने घरों से खदेड़ दिया गया था।
अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों का अपहरण जारी
विश्व धार्मिक आजादी पर बने अमेरिकी आयोग (एससीआईआरएफ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों से महिलाओं के अपहरण का एक लंबा इतिहास है। यहां नाबालिग लड़कियों का धार्मिक हिंसा और उत्पीड़न का शिकार होना जारी है। रिपोर्ट में इस बात का ताजा उदाहरण हसन अब्दाल शहर में गुरुद्वारा पंजा साहिब के प्रमुख ग्रंथी की बेटी का दिया गया जिसे हाल ही में अगवा किया गया और उसके बाद अपहरण के विरोध में पाकिस्तान उच्चायोग के सामने सिख समुदाय ने प्रदर्शन किया। रिपोर्ट में हर साल पाक में 1000 महिलाओं के धर्मांतरण का भी जिक्र है।
परिजनों के दुष्कर्म का शिकार हो रहीं पाकिस्तानी औरतें
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक तो दूर यहां की महिलाएं ‘अपनों’ के बीच ही सुरक्षित नहीं हैं। इमरान खान ‘नया पाकिस्तान’ में होने वालीं दुष्कर्म की 82 फीसदी घटनाओं में अपराधी परिवार का सदस्य ही होता है। यह दावा पाकिस्तानी सांसद शंदना गुलजार खान ने लगाया है। उन्होंने एक टीवी शो में वॉर ऑन रेप ग्रुप के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ज्यादातर ऐसे मामलों में पीड़िता के परिजन ही शामिल होते हैं।