सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तजा ने संधि के निलंबन पर भारत सरकार की औपचारिक अधिसूचना पर प्रतिक्रिया दी है। इसे लेकर उन्होंने अपनी भारतीय समकक्ष देवश्री मुखर्जी को एक पत्र लिखा है। इसमें मुर्तजा ने भारत द्वारा जताई गई आपत्तियों पर चर्चा करने के लिए हामी भरी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार तत्परता से इस मुद्दे पर वार्ता करना चाहती है। इस पत्र में मुर्तजा ने कहा है कि सिंधु जल संधि से मिलने वाले जल पर लाखों लोगों की निर्भरता है, ऐसे में भारत को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। हालांकि उन्होंने अपने पुराने बयान का भी जिक्र किया कि भारत इस संधि को लेकर एकतरफा रूप से कोई निर्णय नहीं ले सकता। वहीं, दूसरी ओर जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों ने इस घटनाक्रम पर आधिकारिक रूप से फिलहाल कोई भी बयान देने से मना कर दिया।
गौरतलब है कि सिंधु जल संधि पर चर्चा के लिए पाकिस्तान की ये पेशकश उसकी छटपटाहट को साफ दिखा रही है। इससे पहले जनवरी, 2023 और बाद में सितंबर 2024 में भारत ने पाकिस्तान को दो बार सिंधु जल संधि पर वार्ता के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन पाकिस्तान ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया, अब जबकि भारत ने समझौते को स्थगित कर दिया है तो पाकिस्तान घुटनों पर आ गया है। वहीं, एक महत्वपूर्ण बात और भी है कि पाकिस्तान की ये अपील तब की गई जब भारत चिनाब नदी पर बगलिहार और सलाल जलविद्युत परियोजनाओं में फ्लशिंग और डिसिल्टिंग का काम शुरू कर दिया है।
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सिंधु जल समझौता
सिंधु जल समझौता, 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक जल-बंटवारा समझौता है। इसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी। इस समझौते का उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच विवादों को रोकना था। इस संधि के तहत, हिमालय के सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों को दो भागों में बांटा गया है। पूर्वी नदियों ब्यास, रावी और सतलुज का पानी भारत को मिलता है जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का कंट्रोल पाकिस्तान के पास आया। समझौते के तहत भारत को लगभग 30 प्रतिशत और पाकिस्तान को 70 प्रतिशन पानी का हक मिला। इस समझौते में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि झेलम, चिनाब और सिंधु नदियों का पानी भारत को पाकिस्तान में जाने देना होगा।
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पाकिस्तान हो गया परेशान
सिंधु जल संधि को रोकने के भारत के कदम से पाकिस्तान परेशान हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि पाकिस्तान पहले से ही सूखे का संकट झेल रहा है। भारत की ओर पानी बंद कर देने से संकट और बढ़ गया। बीते दिनों पाकिस्तान के कानून और न्याय राज्य मंत्री अकील मलिक ने कहा था कि हम तीन अलग-अलग कानूनी विकल्पों की योजना पर काम कर रहे हैं। इस मामले को स्थायी मध्यस्थता न्यायालय या हेग में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और विश्व बैंक में ले जाने पर विचार किया जा रहा है। लेकिन पाकिस्तान को तीनों जगह से राहत कम मिलने की उम्मीद है।