फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pakistan: क्या अब संवैधानिक संकट की तरफ बढ़ रहा है पाकिस्तान? राष्ट्रपति ने खड़ी की सरकार लिए मुश्किलें

Tue, 21 Jun 2022 04:07 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

सोमवार को राष्ट्रपति ने नेशनल एकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) अध्यादेश में संशोधन के लिए पारित बिल को अस्वीकार कर दिया। पीडीएम का दावा है कि पूर्व इमरान खान सरकार ने एनएबी को गलत ढंग से लागू किया। पीटीआई ने ये अध्यादेश उच्च पदों पर बैठे लोगों के कथित भ्रष्टाचार की सजा तय करने के लिए लागू किया था...
विज्ञापन
पाक राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ - फोटो : for reference only
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आर्थिक समस्याओं और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे पाकिस्तान में अब गहरा संवैधानिक संकट भी खड़ा होता दिख रहा है। राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के संसद से पारित दो विधेयकों पर दस्तखत करने से इनकार कर देने से शहबाज शरीफ सरकार के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है।

विज्ञापन


राष्ट्रपति अल्वी का संबंध पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी से है। शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) सरकार ने दो ऐसे बिल पारित कराए, जिनका मकसद पूर्व पीटीआई सरकार के समय बनाए गए दो कानूनों में संशोधन करना था।

शरीफ सरकार के इस बिल पर नहीं किए दस्तखत

नेशनल असेंबली और सीनेट ने निर्वाचन (संशोधन) विधेयक-2022 पारित किया था। उसका मकसद उन चुनाव नियमों को बदलना था, जिन्हें पूर्व इमरान खान सरकार ने लागू किया था। पीडीएम में शामिल दल इन नियमों के खिलाफ थे। पीडीएम ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर वह इन नियमों को बदल देगा। कुछ रोज पहले अल्वी ने उस संशोधन बिल पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया।

सोमवार को राष्ट्रपति ने नेशनल एकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) अध्यादेश में संशोधन के लिए पारित बिल को अस्वीकार कर दिया। पीडीएम का दावा है कि पूर्व इमरान खान सरकार ने एनएबी को गलत ढंग से लागू किया। पीटीआई ने ये अध्यादेश उच्च पदों पर बैठे लोगों के कथित भ्रष्टाचार की सजा तय करने के लिए लागू किया था। राष्ट्रपति ने संशोधन बिल पर यह कहते हुए दस्तखत करने से इनकार कर दिया है कि ये विधेयक संबंधित अध्यादेश को कमजोर करेगा। राष्ट्रपति ने एक बयान में कहा- ‘एनएबी के अमल में खामियां रहीं। उसका दुरुपयोग राजनीतिक मकसदों से सत्ता में बैठे लोगों ने किया। लेकिन मौजूदा बिल उन खामियों को दूर कर एनएबी को मजबूत करने के बजाय उसे बेहद कमजोर कर देगा।’

विज्ञापन


इसके पहले इमरान खान ने एनएबी में संशोधन को पाकिस्तान के इतिहास में एक ‘काला दिन’ बताया था। इसी बहाने पर शरीफ सरकार पर निशाना साधते हुए इमरान खान ने कहा- ‘अमेरिका समर्थित सरकार ने पूरी अर्थव्यवस्था और राजनीतिक प्रणाली को पटरी से उतार से दिया है।’

सरकार के लिए मुश्किल होगा एजेंडा लागू करना

पर्यवेक्षकों की राय है कि राष्ट्रपति के रुख को देखते हुए पाकिस्तान सरकार के लिए अपने एजेंडे को लागू कर पाना अब काफी कठिन दिखने लगा है। संविधान विशेषज्ञों के मुताबिक संसदीय प्रणाली में संसद और उसके प्रति जवाबदेह सरकार की सर्वोच्चता होती है। इस व्यवस्था में राष्ट्रपति महज संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जिनसे अधिक से अधिक सरकार को सलाह देने की अपेक्षा की जाती है। लेकिन वे स्वतंत्र रूप से फैसले ले लेने लगें, तो उससे संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है।

देश में बन रही स्थिति के बीच विशेषज्ञ अब सवाल उठाने लगे हैं कि क्या पाकिस्तान में शासन करना अब असंभव हो गया है। अमेरिका, ब्रिटेन, और संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत रह चुकीं मलीहा लोदी ने अखबार डॉन में लिखी एक टिप्पणी कहा है कि शासन संबंधी समस्याएं पहले से रही हैं, लेकिन हाल में जिस ढंग से राजनीतिक ध्रुवीकरण तीखा हुआ है, वह अभूतपूर्व है। उन्होंने लिखा है- ‘पूर्व सत्ताधारी दल के समझौताविहीन रुख से ये ध्रुवीकरण और तीखा हुआ है। इससे सहमति का आधार खत्म हो गया है और राजनीतिक मेल-मिलाफ लगभग असंभव हो गया है।’

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें