बलूच यकजेहती समिति ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाया है। बीवाईसी के अनुसार, पाकिस्तान के सुरक्षा बलों की तरफ से बलूच नेता के घर पर पहले छापेमार कार्रवाई की गई और इसके बाद उसके पिता को अगवा कर लिया गया है।
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों और आतंकवाद निरोधक विभाग (सीटीडी) ने कल देर रात क्वेटा के केली कंबरनी इलाके में बलूच यकजेहती समिति (बीवाईसी) की कार्यकर्ता बीबो बलूच के घर पर छापा मारा और उसके पिता मामा गफर कंबरनी को जबरन अगवा कर लिया। बीबो बलूच को पिछले दो हफ्तों से हुड्डा जेल में बीवाईसी के आयोजक महरंग बलूच के साथ पाकिस्तानी अधिकारियों की हिरासत में रखा गया है। बीवाईसी ने बताया कि आज सुबह सबीहा बलूच के पिता को भी हिरासत में लिया गया।
बलूच यकजेहती समिति ने लगाए कई आरोप
सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में, बलूच यकजेहती समिति (बीवाईसी) ने कहा, 'आज रात, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों और तथाकथित आतंकवाद निरोधक विभाग (सीटीडी) ने केली कंबरनी, क्वेटा में बलूच यकजेहती समिति (बीवाईसी) कार्यकर्ता बीबो बलूच के घर पर छापा मारा और उसके पिता मामा गफर कंबरनी को जबरन अगवा कर दिया। एक वरिष्ठ राजनीतिक कार्यकर्ता, मामा गफर पहले भी राज्य के अधिकारियों के हाथों जबरन गायब होने का शिकार हो चुके हैं।'
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यह बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन है- बीवाईसी
बीवाईसी ने आगे कहा, 'यह न केवल बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन है; यह बलूचिस्तान के लोगों पर थोपी जा रही सत्तावाद और फासीवाद की स्पष्ट अभिव्यक्ति है। शांतिपूर्ण राजनीतिक सक्रियता के लिए राजनीतिक कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को निशाना बनाना न केवल गैरकानूनी है - यह बेहद अमानवीय है।' बीवाईसी ने आगे कहा, 'हमारी नैतिक, ऐतिहासिक और संवैधानिक जिम्मेदारी हमें इन गंभीर अन्यायों के खिलाफ़ बोलने और राज्य के नेतृत्व वाले दमन के सभी रूपों के खिलाफ़ दृढ़ प्रतिरोध में खड़े होने के लिए मजबूर करती है।'
बलूच यकजेहती समिति ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से मामा गफर और अन्य सभी बलूच व्यक्तियों के लिए आवाज उठाने और कार्रवाई करने का आग्रह किया, जिन्हें जबरन गायब कर दिया गया है। बलूचिस्तान राज्य के दमन, जबरन गायब किए जाने और कार्यकर्ताओं, विद्वानों और नागरिकों की न्यायेतर हत्याओं से जूझ रहा है। इस क्षेत्र को आर्थिक उपेक्षा, खराब बुनियादी ढांचे और सीमित राजनीतिक स्वायत्तता का सामना करना पड़ रहा है। प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद, स्थानीय समुदायों को बहुत कम लाभ होता है, जबकि जबरन गायब होना एक व्यापक मुद्दा बना हुआ है।