पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के दस्ते पर हुए आत्मघाती हमले को लेकर एक बार फिर झूठ बोला है। पाकिस्तान का कहना है कि इस हमले के बाद जिन 54 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया था वो पुलवामा हमले की साजिश में शामिल नहीं हैं। उन्हें हिरासत में लेकर जांच की गई लेकिन हमले से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला। इन संदिग्धों का हमले से कोई संबंध नहीं है।
पाकिस्तान के विदेश विभाग द्वारा जारी बयान में यह भी कहा गया है कि, भारत ने जिन 22 स्थानों पर आतंकी शिविर होने की जानकारी दी थी, उनकी जांच की गई| इसके बाद पता चला कि ऐसे कोई आतंकी शिविर हैं ही नहीं। बयान में कहा गया है कि यदि भारत अनुरोध करेगा तो पाकिस्तान इन स्थानों की यात्रा की इजाजत भी दे सकता है। पाक ने कहा कि सहयोग करने की प्रतिबद्धता के मद्देनजर उसने कुछ प्रश्नों के साथ अपनी जांच के प्रारंभिक निष्कर्ष बुधवार को भारत के साथ साझा किए।
भारत ने पुलवामा आतंकी हमले के जिम्मेदार आतंकी मसूद अजहर के खिलाफ पाकिस्तान को सबूत सौंपे थे। ये सबूत उस वक्त सौंपे गए जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने हमले के सबूत सामने आने पर कार्रवाई करने की बात कही थी। इसमें पाकिस्तान स्थित आतंकियों के ठिकानों के बारे में कहा गया है। भारत ने 27 फरवरी को डोजियर पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त को सौंपा था। अब इस जांच के माध्यम से पाकिस्तान ने खानापूर्ति की है।
पाकिस्तान के विदेश विभाग ने कहा कि डोजिअर मिलने के बाद जांच दल का गठन किया गया, कई लोगों को जांच के लिए हिरासत में लिया गया, सोशल मीडिया सामग्री के तकनीकी पहलुओं पर भी काम किया गया, जो भारतीय दस्तावेजों का मुख्य आधार है।
पाकिस्तानी विदेश विभाग ने कहा है, भारत की ओर से सौंपा गया डोजियर 91 पन्नों का है। जिसके छह भाग हैं। केवल दूसरा और तीसरा भाग ही पुलवामा हमले से संबंधित है। अन्य भागों में सामान्य आरोप लगाए गए हैं। पकिस्तान उन भागों पर ध्यान दे रहा है जो पुलवामा हमले से संबंधित हैं।
पाकिस्तान का कहना है कि उसने जांच के दौरान उन सभी जानकारियों की भी अच्छी तरह से जांच की गई है, जो भारत ने सौंपी हैं। इसमें आदिल डार का वीडियो भी है, जिसमें वो हमले की जिम्मेदारी ले रहा है। इसमें पुलवामा हमले का समर्थन करने वाले वीडियो और मैसेज शेयर करने के लिए जिन व्हाट्सएप और टेलीग्राम नंबरों का इस्तेमाल हुआ भी शामिल हैं।