पाकिस्तान में सियासी संकट लगातार गहराता जा रहा है। प्रधानमंत्री इमरान खान अपनी कुर्सी बचाने के लिए रोजाना कोई न कोई हथकंडा अपना रहे हैं। उन्होंने इस सियासी उथल-पुथल के बीच विपक्ष पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें विदेश से धमकी भरा पत्र मिल रहा है और वे इस पत्र को आज पत्रकारों से साझा करेंगे। हालांकि विपक्षी पार्टियों ने इसे संसद में साझा करने की चुनौती दी थी लेकिन वे इस बात से मुकर गए थे। अब देखने वाली बात ये होगी कि इस धमकी भरे पत्र में आखिर क्या लिखा गया है। वहीं आज इस्लामाबाद में इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट सुविधा के शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को एक विदेशी आयातित संकट घोषित किया।
एमक्यूएम-पी ने छोड़ा इमरान का साथ
इमरान खान की सरकार की विदाई लगभग तय हो गई है। दरअसल, पीएम इमरान खान नीत पीटीआई के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन से मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट- पाकिस्तान (MQM-P) ने भी नाता तोड़ लिया है। उसने अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान में विपक्ष का साथ देने का एलान किया है।
एमक्यूएम-पी द्वारा इमरान की पार्टी पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) का साथ छोड़ना बड़ा झटका है, क्योंकि उनके समर्थक दलों व सांसदों की संख्या लगातार घट रही है। उनकी सरकार अल्पमत में आ चुकी है। जियो टीवी के अनुसार इमरान सरकार पाकिस्तानी संसद के निचले सदन में बहुमत खो चुकी है, भले ही पाक नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान तीन अप्रैल को होने वाला है और इसके बाद औपचारिक पतन होगा।
बहुमत के लिए 172 सांसदों का समर्थन
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की कुल सदस्य संख्या 342 है। बहुमत के लिए 172 सांसदों का समर्थन चाहिए। इमरान नीत पीटीआई गठबंधन के पास 179 सदस्य थे, लेकिन MQM-P द्वारा साथ छोड़ने से उसके पास 164 सदस्य रह गए हैं। दूसरी ओर विपक्ष की संख्या बढ़कर 177 हो गई है। इमरान के 24 सांसद बागी बताए जा रहे हैं, अब यदि वे अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष का समर्थन नहीं करें तो भी सरकार गिर जाएगी।