भ्रष्टाचार से जुड़े पनामा लीक्स मामले की जांच के लिए पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत ने जेआईटी यानी संयुक्त जांच कमेटी का गठन किया था। जेआईटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी। उसके बाद अदालत में उस रिपोर्ट पर सुनवाई हुई। बीते हफ़्ते सुनवाई पूरी हो गई, लेकिन अदालत ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा है।
फ़ैसले की तारीख़ के बारे में अदालत ने कुछ नहीं कहा है। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार अदालत ने कहा है कि प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को उस पद पर बने रहने के अयोग्य ठहराने पर भी विचार किया जाएगा।
कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में पाया था कि नवाज़ शरीफ़ और उनके परिवार ने जो दौलत जमा की है उसका वो ठीक तरह से हिसाब देने में नाकाम रहे थे कि उन्होंने ये दौलत कहां से जमा की है। अख़बार जंग के मुताबिक़ अदालत ने जेआईटी के बारे में कहा कि उन्होंने जिन हालात में काम किया वो निश्चित तौर पर तारीफ़ के काबिल है।
जंग के अनुसार अदालत ने कहा, ''हम गारंटी देते हैं प्रधानमंत्री की अयोग्यता का जायज़ा लेंगे। अगर हमने मुक़दमा चलाने का फ़ैसला सुनाया तो ये फ़ेयर ट्रायल होगा। सभी व्यक्तियों के मूल अधिकारों की रक्षा की जाएगी।''
अख़बार के अनुसार नवाज़ शरीफ़ ने कहा है कि अदालत का हर फ़ैसला उन्हें स्वीकार होगा और अगर फ़ैसला उनके पक्ष में नहीं आया तो वो हर संभव संवैधानिक और क़ानूनी विकल्प तलाश करेंगे। अख़बार एक्सप्रेस लिखता है कि फ़ैसला सुरक्षित रखने के फ़ैसले के बाद नवाज़ शरीफ़ की पार्टी मुस्लिम लीग(नून) के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि कुछ लोग चोर दरवाज़े से सत्ता हासिल करने का ख़्वाब देख रहे हैं।