पाकिस्तान में बलोचों के साथ होने वाले सरकारी दुर्व्यवहार पर बलोच यकजेहती समिति (बीवाईसी) ने एक अर्ध-वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट (जनवरी-जून 2025) जारी की है। इसमें बलूचिस्तान प्रांत में व्यवस्थित और व्यापक सरकारी दमन को लेकर तथ्य पेश किए गए हैं। द बलूचिस्तान पोस्ट (टीबीपी) के मुताबिक, बीवाईसी ने अपनी रिपोर्ट में सिर्फ आंकड़े ही नहीं दिए बल्कि बलोचों की सामूहिक पीड़ा, अन्याय और सांविधानिक सुरक्षा उपायों के पतन का रिकॉर्ड भी पेश किया है।
बीवाईसी नेता सम्मी दीन बलोच ने कहा, रिपोर्ट के निष्कर्ष पीड़ितों के परिवारों, प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मानवाधिकार संगठनों की गवाही पर आधारित हैं, जो जबरन गायब किए जाने और न्यायेतर हत्याओं में खतरनाक वृद्धि को दर्शाते हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की पहली छमाही में 752 लोगों को जबरन गायब किया गया। इनमें से 181 को बाद में रिहा कर दिया गया, जबकि 25 की कथित तौर पर हिरासत में मौत हो गई। 546 व्यक्तियों का ठिकाना अज्ञात है।
बलूचिस्तान पोस्ट ने बताया कि मकरान क्षेत्र में सबसे अधिक संख्या में लोग गायब हुए, जिनमें फ्रंटियर कोर (एफसी) के कर्मियों को मुख्य अपराधी बताया गया। रिपोर्ट में 117 न्यायेतर हत्याओं में अधिकांश फर्जी मुठभेड़ों और हिरासत में हत्याओं से जुड़ी हुई हैं।
बीएलए ने ली सशस्त्र अभियानों की जिम्मेदारी, 23 मार गिराए
बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों में एक साथ कई सशस्त्र अभियानों की जिम्मेदारी ली है। बीएलए ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने पिछले दिनों एक उच्च पदस्थ अधिकारी समेत कम से कम 23 पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को मार गिराया और खुफिया एजेंसियों से जुड़ी सैन्य सुविधाओं और संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया। बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलोच ने संकेत दिया कि समूह के लड़ाकों ने मस्तुंग, कलात, जमुरान, बुलेदा और क्वेटा जैसे स्थानों पर पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाया और नुश्की, दलबंदिन और पंजगुर में भी हमले किए।